Sarhul Festival 2026 : क्या आप जानते हैं सरहुल से पहले नया कटहल खाना क्यों है मना ? जाने रोचक तथ्य

Sarhul Festival 2026 : क्या आप जानते हैं सरहुल से पहले नया कटहल खाना क्यों है मना ? जाने रोचक तथ्य

Sarhul Festival 2026 झारखंड के आदिवासियों का  प्रमुख त्योहारों में से एक है यह लगभग पुरे झारखंड में मनाया जाता है और इसे आदिवासी वर्ग का पवित्र वरव भी कहा जाता है वस्तुत इस त्यौहार में प्रकृति की पूजा की जाती है   सरहुल के दौरान साल वृक्ष की पूजा, पारंपरिक नृत्य, गीत ढोल नगाड़ा मांदर के साथ सामूहिक  भोज का का भी आयोजन होता है . एक दिलचस्प बात यह भी है की सरहुल से पहले नया कटहल नहीं खाया जाता जबतक की पहान पूजा सम्पन नहीं करता |

इस पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति, सूर्य और पृथ्वी के को पूजते हैं  सरहुल  पर्व  खासतौर पर झारखंड के उरांव, मुंडा, और अन्य आदिवासी समुदायों के बीच बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर गांवों भाईचारा  स्नेह  खुशी और उत्सव का माहौल देखने को मिलता है.लोग बढ़ चढ़ के इस त्यौहार को पुरे झारखंड में मानते हैं

सरहुल क्यों मानते हैं और क्या है महत्त्व

सरहुल का शाब्दिक अर्थ  ‘सर’ यानि सखुवा का पेड़ और हुल मतलब पूजा ,उत्सव मानना | कहते हैं आदिवासियों के लिए प्रकृति ही देवता है तो जब बसंत रितु में साल के पेड़ में नए फुल आते हैं  तो इसे प्रकृति की जन्म का स्वागत कहा जाता है लोग प्रक्रति कोधन्यवाद देते हैं और पर्व ख़ुशी से मानते हैं

 सरहुल कब है

सरहुल पर्व 21 मार्च,20 26 दिन  शनिवार को मनाया जाएगा.  वैसे देखा जाये तो सरहुल अलग अलग जगहों में थोडा मानाने की तिथि में बदलाव देखने को मिलता है और पुरे jharkahnd के जिलों में जुलुस के साथ भारी संख्या में गाँव कसबे से लोग निकल कर अपने पारंपरिक ड्रेस में जुलुस में शामिल होते हैं गाँव के लोग मिलजुल कर अपने गाँव में घोषणा करते हैं और त्यौहार को सफल बनाते हैं

सरहुल पूजा  का अलग -अलग नाम

सरहुल पर्व विभिन्न जनजातियों के बीच अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. झारखंड  के विशेष व्  सरना समाज में इसे ‘खद्दी’ या ‘खेखेल बेंजा’ कहते है व् वहीं झारखंड के अन्य जनजाति की थोड़ी अलग विधि होती है परन्तु  प्रकृति और ग्राम देवताओं की पूजा वे भी करते हैं  विशेषकर सरना समाज के लोग इसे खाफी हर्सुलास के साथ मानते हैं

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नृत्य, गीत और सामुदायिक उत्सव

सरहुल पर्व के दौरान आदिवासी समुदाय के लोग अपने विशेष पारंपरिक परिधानों में सजते हैं. पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी मिलकर पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत करते हैं. गांव के अखड़ा में सामूहिक नृत्य का आयोजन किया जाता है, बचे बूढ़े व् जवान और घर की ओरत सभी गाँव के आखाडा में उपस्थित होकर पर्व मानाने है एवं  पारंपरिक पेय हांडिया का सेवन भी करते हैं.

महिलाएं और पुरुष साल के फूलों को अपने सिर और चेहरे पर सजाते हैं और प्रकृति के इस उत्सव में शामिल होते हैं. सरहुल केवल एक त्योहार ही नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक है. यही कारण है कि झारखंड में यह पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

सरहुल से पहले नया कटहल नहीं खाया जाता : कटहल का नियम 

सरहुल झारखंड के आदिवासियों जैसे उरांव मुंडा हो और संथाल इन सभी जनजाति का एक प्रमुख  प्रक्रति पर्व है | कहा जाता है की जब तक सरहुल पर्व सम्पान नहीं होता कटहल नहीं  खाते हैं  विशेष रूप से कुछ गाँव में यह परम्परा रही है की जब तक पुजारी के द्वारा पूजा संपन नहीं किया जाता और प्रक्रति को धन्यवाद नहीं दिया जाता तबतक कटहल नहीं खाते हैं

आदिवासियों का नया साल की सुरुवात 

सरहुल पर्व चैत महिना में मनाया जाता है और प्रकृति भी अपने नए सिरे से सुरुवात करती है नए पत्ते आते हैं सखाये निकलती है फुल फल लगती है जिसके आगमन से यह उत्सव आदिवासियों के लिए महत्वपूर्ण होता है

  • सखुवा : चुकी सखुवा यानि साल के फुल को  सरहुल पर्व की एक विशेष पहचान भी कहा जा सकता हैं जिसे पर्व के दौरान लोग अपने बाल में खोस्ते हैं
  • नए फल सब्जी : सरहुल पूजा के समाप्ति से पहले इस समय में फल जैसे कटहल आम  का सेवन कुछ लोग नहीं करते हैं इसका मुख्य कारण प्रकृति के प्रति सामान से है की जबतक हम प्रक्रति के द्वारा दिए गये चीजे का धन्यवाद नही करते  तबतक नए फलों को सेवन नहीं करना चाहिए |

 

best places to visit in India 2025

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best places to visit in India 2025

भारत एक धार्मिक  सांस्कृतिक एव, एतेहासिक  दृष्टिकोण से  विविधतापूर्ण देश है, जहां हर नागरिक इस रंग मंच में अपना योगदान दे रहा है जो सभी के भाईचारे का प्रतिक है वैसे में यदि फिर भी आप भारत के कोने देखना चाहते हैं तो आपके लिए आज इस लेख में भारत के  best places to visit in India 2025 के बारे में जानने को मिलेगा और जो यात्रा करते हैं जिन्हें traveling करने में मजा आता है उनके लिए The 25 best places to go in 2025 for indian जगह के बारे में बताएँगे । यदि आप 2025 में भारत के कोने कोने तक  घूमने की प्लानिंग कर  रहे हैं, तो ये 25  ऐसे स्थान जिन्हें आप  मिस नही कर सकते –

 

1. उदयपुर, राजस्थान – झीलों का शहर, भव्य महल और ऐतिहासिक धरोहर।

उदयपुर, राजस्थान – झीलों का शहर और ऐतिहासिक धरोहर

उदयपुर, जिसे “झीलों की नगरी” कहा जाता है, राजस्थान का एक शानदार पर्यटन स्थल है। यह शहर अपनी भव्य महलों, ऐतिहासिक किलों और सुरम्य झीलों के लिए प्रसिद्ध है। लेक पिचोला, फतेहसागर झील, सिटी पैलेस, सज्जनगढ़ किला (मानसून पैलेस) और जग मंदिर जैसे आकर्षण इसे एक अद्वितीय पर्यटन स्थल बनाते हैं। यहां की हवेलियाँ, संग्रहालय और संकरी गलियां शहर के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास को दर्शाती हैं।

इसके अलावा, उदयपुर का राजस्थानी खानपान, रंगीन बाजार और पारंपरिक लोक नृत्य एवं संगीत यात्रियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। अगर आप शाही विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक जीवंतता का अनुभव करना चाहते हैं, तो उदयपुर 2025 में घूमने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। 🌊🏰✨

2. मैसूर, कर्नाटक – मैसूर पैलेस और योग केंद्र के लिए प्रसिद्ध।

मैसूर, कर्नाटक – शाही विरासत और योग का केंद्र

मैसूर, जिसे “सैंडलवुड सिटी” और “कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी” कहा जाता है, अपनी भव्य ऐतिहासिक विरासत और योग केंद्रों के लिए प्रसिद्ध है। मैसूर पैलेस, जिसकी भव्यता हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती है, शहर का सबसे बड़ा आकर्षण है। इसके अलावा, चामुंडी हिल्स, वृंदावन गार्डन, जगनमोहन पैलेस और सेंट फिलोमिना चर्च जैसे स्थल भी दर्शनीय हैं।

मैसूर विश्व प्रसिद्ध अष्टांग योग केंद्रों का प्रमुख केंद्र है, जहां दुनियाभर से योग साधक आते हैं। इसके अलावा, दशहरा उत्सव के दौरान मैसूर का राजसी वैभव देखने लायक होता है।

3. मुंबई, महाराष्ट्र – बॉलीवुड, गेटवे ऑफ इंडिया और शानदार नाइटलाइफ।

best places to visit in India 2025

मुंबई, महाराष्ट्र – सपनों का शहर और बॉलीवुड का गढ़

मुंबई, जिसे “सपनों की नगरी” कहा जाता है, भारत की आर्थिक राजधानी और मनोरंजन जगत का केंद्र है। यह शहर बॉलीवुड, ऐतिहासिक धरोहर, आधुनिक जीवनशैली और खूबसूरत समुद्री किनारों के लिए प्रसिद्ध है।

मुंबई के प्रमुख आकर्षणों में गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, हाजी अली दरगाह, सिद्धिविनायक मंदिर और एलीफेंटा गुफाएं शामिल हैं। इसके अलावा, जुहू बीच, गिरगांव चौपाटी और बांद्रा वर्ली सी लिंक इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।

4. जयपुर, राजस्थान – गुलाबी नगरी, ऐतिहासिक किले और महल। best place in jaipur

जयपुर, राजस्थान – गुलाबी नगरी और शाही वैभव का प्रतीक

जयपुर, जिसे “गुलाबी नगरी” कहा जाता है, अपनी राजपूताना शान, भव्य महलों और ऐतिहासिक किलों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर राजस्थान की राजधानी होने के साथ-साथ भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है।

यहां के प्रमुख आकर्षणों में अमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल, जंतर मंतर और नाहरगढ़ किला शामिल हैं। जयपुर की रंगीन गलियों में घूमते हुए बापू बाजार और जौहरी बाजार से पारंपरिक हस्तशिल्प, गहने और मशहूर ब्लू पॉटरी की खरीदारी का मजा लिया जा सकता है।

इसके अलावा, राजस्थानी खानपान जैसे दाल-बाटी-चूरमा, घेवर और प्याज़ कचौरी का स्वाद इस यात्रा को और यादगार बना देता है।

अगर आप शाही इतिहास, वास्तुकला और संस्कृति का अनुभव करना चाहते हैं, तो जयपुर 2025 में घूमने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। 🏰🎭🎨

5. जोधपुर, राजस्थान – नीली नगरी और प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किला। nili nagri

जोधपुर, राजस्थान – नीली नगरी और ऐतिहासिक शान

जोधपुर, जिसे “नीली नगरी” और “थार रेगिस्तान का प्रवेश द्वार” कहा जाता है, अपनी ऐतिहासिक विरासत, भव्य किलों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। शहर की पहचान इसका शानदार मेहरानगढ़ किला है, जो भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है और जोधपुर की शान माना जाता है।

इसके अलावा, उमेद भवन पैलेस, जसवंत थड़ा, मंडोर गार्डन और क्लॉक टॉवर मार्केट भी प्रमुख आकर्षण हैं। जोधपुर की संकरी गलियों में घूमते हुए नीले रंग से रंगी हुई इमारतें इस शहर को एक अनोखी पहचान देती हैं।

खानपान के शौकीनों के लिए मिर्ची बड़ा, प्याज कचौरी और मावा कचौरी का स्वाद लेना बेहद खास अनुभव होता है।

6. चेन्नई, तमिलनाडु – सांस्कृतिक राजधानी और समुद्र तटों का आकर्षण।

चेन्नई, तमिलनाडु – सांस्कृतिक राजधानी और समुद्र तटों का शहर

चेन्नई, जिसे “दक्षिण भारत की सांस्कृतिक राजधानी” कहा जाता है, अपनी समृद्ध परंपरा, मंदिरों, औपनिवेशिक धरोहर और सुंदर समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर आधुनिकता और संस्कृति का बेहतरीन संगम है।

चेन्नई के प्रमुख आकर्षणों में मरीना बीच (भारत का सबसे लंबा समुद्र तट), कपालीश्वर मंदिर, फोर्ट सेंट जॉर्ज, संथोम चर्च और सरकारी संग्रहालय शामिल हैं। इसके अलावा, महाबलीपुरम के ऐतिहासिक रथ मंदिर और बटर बॉल जैसी संरचनाएँ इस शहर के गौरवशाली अतीत को दर्शाती हैं।

चेन्नई अपने पारंपरिक सांभर-डोसा, फिल्टर कॉफी और चेत्तीनाड व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की नाइटलाइफ, शॉपिंग मॉल और कला-संगीत के कार्यक्रम यात्रियों को खास अनुभव प्रदान करते हैं।

अगर आप समुद्र तटों, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक समृद्धि का आनंद लेना चाहते हैं, तो चेन्नई 2025 में घूमने के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। 🌊🏛️🎭

 

7. कोलकाता, पश्चिम बंगाल – ऐतिहासिक धरोहर और साहित्यिक संस्कृति का केंद्र।

कोलकाता, पश्चिम बंगाल – ऐतिहासिक धरोहर और साहित्यिक संस्कृति का केंद्र

कोलकाता, जिसे “सिटी ऑफ जॉय” कहा जाता है, भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मानी जाती है। यह शहर अपनी औपनिवेशिक धरोहर, कला, साहित्य और अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

यहां के प्रमुख आकर्षणों में हावड़ा ब्रिज, विक्टोरिया मेमोरियल, इंडियन म्यूजियम, कालीघाट मंदिर, बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर काली मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा, कॉफ़ी हाउस, कॉलेज स्ट्रीट और कुमोरटोली साहित्य और कला प्रेमियों के लिए खास आकर्षण हैं।

कोलकाता का स्ट्रीट फूड भी बेहद लोकप्रिय है, खासकर रोल्स, फुचका (पानी पुरी), मिष्टी दोई और रोशोगुल्ला। दुर्गा पूजा के दौरान यह शहर जीवंत हो उठता है, जब इसकी सांस्कृतिक भव्यता अपने चरम पर होती है।

अगर आप इतिहास, साहित्य और संस्कृति का संगम देखना चाहते हैं, तो कोलकाता 2025 में घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। 🏛️📖🎭

 

8. नई दिल्ली – भारत की राजधानी, जहां इतिहास और आधुनिकता का संगम है।

नई दिल्ली – इतिहास और आधुनिकता का संगम

नई दिल्ली, भारत की राजधानी, अपने शानदार ऐतिहासिक स्थलों, आधुनिक संरचनाओं और विविध सांस्कृतिक अनुभवों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर प्राचीन धरोहर और आधुनिक विकास का अनूठा मेल प्रस्तुत करता है।

यहां के प्रमुख आकर्षणों में इंडिया गेट, कुतुब मीनार, लाल किला, हुमायूं का मकबरा, अक्षरधाम मंदिर और राष्ट्रपति भवन शामिल हैं। साथ ही, चांदनी चौक की गलियों में घूमकर पारंपरिक स्वादों का आनंद लिया जा सकता है, जबकि कनॉट प्लेस और साकेत जैसी जगहें शॉपिंग और नाइटलाइफ के लिए परफेक्ट हैं।

दिल्ली का स्ट्रीट फूड बेहद मशहूर है, जिसमें चाट, परांठे, बटर चिकन और गोलगप्पे विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं।

9. वाराणसी, उत्तर प्रदेश – गंगा किनारे बसी सबसे प्राचीन और धार्मिक नगरी।

वाराणसी, उत्तर प्रदेश – गंगा किनारे बसी सबसे प्राचीन और धार्मिक नगरी

वाराणसी, जिसे “काशी” और “मोक्ष की नगरी” भी कहा जाता है, दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में से एक है। यह शहर अपनी आध्यात्मिकता, मंदिरों और गंगा नदी के किनारे बसे खूबसूरत घाटों के लिए प्रसिद्ध है।

वाराणसी के प्रमुख आकर्षणों में काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, संकट मोचन मंदिर और सारनाथ शामिल हैं। यहां हर शाम गंगा आरती का भव्य आयोजन होता है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य अनुभव होता है।

वाराणसी अपने स्वादिष्ट बनारसी पान, कचौड़ी-जलेबी और लड्डू के लिए भी मशहूर है। इसके अलावा, यहां की संकरी गलियों में घूमना और बनारसी साड़ियों की खरीदारी करना एक अनोखा अनुभव देता है।

10. आगरा, उत्तर प्रदेश – ताजमहल और अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक स्थल।

आगरा, उत्तर प्रदेश – ताजमहल और मुगलकालीन विरासत का शहर

आगरा, जिसे “मुगल साम्राज्य की धरोहर” कहा जाता है, भारत के सबसे ऐतिहासिक शहरों में से एक है। यह शहर विश्वप्रसिद्ध ताजमहल, जिसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है, के लिए जाना जाता है।

आगरा के प्रमुख आकर्षणों में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, इत्माद-उद-दौला (बेबी ताज) और मेहताब बाग शामिल हैं। ये सभी मुगल वास्तुकला की भव्यता और शिल्पकला को दर्शाते हैं।

यहां का पेठा मिठाई विशेष रूप से मशहूर है, जिसे चखे बिना आगरा यात्रा अधूरी मानी जाती है। साथ ही, यहां के स्थानीय बाजारों में मुगलकालीन हस्तशिल्प और चमड़े के सामान की खरीदारी एक खास अनुभव होता है।

 

 

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 ऋषिकेश, उत्तराखंड – योग और अध्यात्म का केंद्र, गंगा के किनारे बसा एक खूबसूरत शहर।

12. हम्पी, कर्नाटक – यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, प्राचीन मंदिर और खंडहर।

13. अंडमान और निकोबार द्वीप – स्वच्छ समुद्र तट, स्कूबा डाइविंग और प्राकृतिक सौंदर्य।

14. लद्दाख – ऊँची पहाड़ियाँ, मोनेस्ट्री और अद्भुत झीलें।

15. कच्छ का रण, गुजरात – सफेद रेगिस्तान और प्रसिद्ध रण उत्सव।

16. जैसलमेर, राजस्थान – रेगिस्तानी सफारी, स्वर्ण किला और प्राचीन हवेलियाँ।

17. केरल बैकवाटर – हाउसबोट क्रूज़ और प्राकृतिक सुंदरता।

18. मुन्नार, केरल – हरी-भरी चाय की खेती और ठंडी वादियाँ।

19. थेक्कडी, केरल – पेरियार वन्यजीव अभयारण्य और बोट सफारी।

20. कुमारकोम, केरल – बैकवाटर पर्यटन और पक्षी अभयारण्य।

21. फोर्ट कोच्चि, केरल – औपनिवेशिक वास्तुकला और समुद्र तटीय सौंदर्य।

22. कूर्ग, कर्नाटक – कॉफी बागान, हरियाली और सुखद मौसम।

23. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल – प्रसिद्ध चाय बागान और हिमालय का मनोरम दृश्य।

24. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान – बाघ देखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों में से एक।

25. खजुराहो, मध्य प्रदेश – अपनी अद्भुत मूर्तिकला और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध।

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Jharkhand Tourist Spots: Explore Nature, Adventure & Heritage

Jharkhand Tourist Spots: Explore Nature, Adventure & Heritage

Jharkhand Tourist Spots: प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और विरासत का अनोखा परिचय

झारखंड, जिसे “वनों की भूमि” के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक ऐसा राज्य जहाँ Jharkhand Tourist Spots: Explore Nature, Adventure & Heritage  जो प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और ऐतिहासिक धरोहर से भरा हुआ है। यहां की हरी-भरी वादियां, झरने, गुफाएं, धार्मिक स्थल और वन्यजीव अभ्यारण्य हर प्रकार के यात्रियों को अपनी ओर खींचते हैं।

यदि आपको  ऐसे पर्यटन स्थल की तलाश में जो आपको एक नई रोमांस एक नए अनुभव दे सके वैसे में आप झारखंड की राजधानी रांची आ सकते हैं इसमें आपको प्रकृति सुंदर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर ऐसे पर्यटन स्थल मिलेंगे जो आपको एक नए अनुभव प्रदान करेगा तो ऐसे में आप राजधानी रांची आ सकते हैं आज इस लेख में आपको हम प्रावधान रांची में पर्यटन स्थल के बारे में बताने जा रहे हैंअगर आप एक अनोखे पर्यटन अनुभव की तलाश में हैं, तो झारखंड आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस लेख में, हम झारखंड के सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Jharkhand Tourist Spots: Explore Nature, Adventure & Heritage

1. हुंडरू  फॉल्स

झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात के नाम से मशहूर hundrufall जलप्रपात  रांची जिले में स्थित है और यह स्वर्णरेखा नदी पर बना एक बेहद खूबसूरत जलप्रपात है। यह झरना लगभग 320 फीट की ऊंचाई से गिरता है, और इसका नजारा वाकई मनमोहक है। खासकर मानसून के दौरान, यह झरना अपनी पूरी भव्यता में नजर आता है, जिससे यह पिकनिक के लिए एक बेहतरीन जगह बन जाता है।

2. दशम फॉल्स

यदि आप अपने परिवार के साथ एक ऐसी जगह के तलाश करते हैं जो शांत वातावरण हो स्पॉट हिल हो तो वैसे में आप दशमपुर को जा सकते हैं इसकी ऊंचाई ज्यादा नहीं है मात्र 44 मीटर ऊंचाई से नीचे गिरती है । जो कांची नदी पर स्थित है

3. जोन्हा फॉल्स (गौतमधारा फॉल्स)**

गौतम धारा जलप्रपात के नाम से मशहूर जॉन्हा फॉल्स रांची से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह प्रसिद्ध वॉटरफॉल्स है जहां लोग आना पसंद करते हैं खास करके युवा पीढ़ी इस जगह को ज्यादा पसंद करते हैं और इस खूबसूरत से जलप्रपात को निहारने के लिए वीकेंड छुट्टी या नए साल में खूब आते हैं

4. हिरण पार्क (बिरसा जैविक उद्यान)**

राजधानी रांची की में टाउन से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान पार्क जो रांची का सबसे बड़ा चिड़ियाघर भी है जहां आपको भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव जंतु देखने को मिलते हैं जैसे बाघ हिरण चीता तेंदुआ हाथी भालू और अनेकों पक्षी के जातियां आपके यहां पर देखने को मिलती है

5. पतरातू घाटी

लोग अक्सर एक एडवेंचर की तलाश में रहते हैं और वैसे में यदि आपको एक ऐसे रोड ट्रिप के बारे में बताएं जो की बेहतरीन और काफी खूबसूरत तरीके से डिजाइन किया गया  है लोग इस जगह बाइक राइड करने भी आते हैं और खुबसूरत पहाड़ों को निहारने का एक अलग ही मजा है साथ ही बगल में पतरातू झील भी देखने को मिलता है |

6.ध्रुवा डैम

रांची के धुर्वा सेक्टर में मौजूद धुर्वा डैम भी  घुमने फिरने का एक बेहत ओर आकर्षक केंद्र है जहाँ प्रेमी जोड़े हो या दोस्ती यारी सभी का यह है |

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7.पहाड़ी मंदिर

यदि आप थोड़े धार्मिक दृष्टिकोण रखते हैं और आपको मंदिर को एक्स्प्लोर करने का अनुभव लेना है तो रांची के पहाड़ी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है जहाँ सावन में भव्य मेला लगता है लोगो का भीड़ लगा रहता है |

8.जगन्नाथ मंदिर

रांची का यह पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तरह ही बना हुआ है जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित है जहाँ हर साल रथ में भव्य मेला का का आयोजन होता है।

9.देवरी मंदिर

रांची जमेश्यपुर मार्ग पर स्थित तमाड़ के पास देवरी मंदिर  6 भुजाओं वाली देवी की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है और जहाँ लोग बहुत दूर से पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं |

10. मैकलुस्कीगंज

अंग्रेजी हुकूमत को नजदीक से जानने के लिए jharkahnd में इसे  ‘छोटा इंग्लैंड’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ कभी ब्रिटिश लोगों की बस्तियाँ  और  कोठियां बनाई गयी थीं। यह अपनी पुरानी अंग्रेज़ी शैली की कोठियों और हरियाली के लिए मशहूर है।

11.नेतारहाट – ‘छोटा नागपुर की रानी
नेतरहाट, झारखंड का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो अपने अद्भुत सूर्योदय और सूर्यास्त के नज़ारों के लिए मशहूर है। यह जगह उन लोगों के लिए एकदम सही है जो प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं और शांति की तलाश में हैं।

तो इस तरह आपको इस लेख में बताने का प्रयास  किया यदि आप रांची  घूमने के लिए आते हैं तो आप के लिए  अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा होता है। क्या आप इनमें से किसी विशेष स्थान के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो jharkahnd tourism  को visit कर सकते हैं और अधिक जानकारी ले सकते हैं |

Tribes in Jharkhand: Culture, History & Lifestyle of Indigenous Communities (2025 Guide)

Adivasi tribes in Jharkhand

Tribes in Jharkhand: Culture, History & Lifestyle of Indigenous Communities (2025 Guide) tribes in jharkhand

झारखंड  एक आदिवासी बहुल  राज्य है जहाँ बिभिन्न प्रकार के जनजाति पाई इस लेख में झारखंड के जनजाति एवं उनके डिटेल जानने का प्रयास करेंगे List of tribes in Jharkhand with their details मुख्यत 32 अनुसूचित जनजातियों का समूह हैं, जो झारखंड में बसने  वाली जनजाति है जिसमे असुर ,उरांव ,बंजारा ,भातुदी ,भूमिज ,बिजरिया,बिरोह ,छेरो ,बेडिया,चिक बड़ाईक गोंदी जैसे प्रमुख Tribes of Jharkhand and their languages हैं  चलिए जानते हैं

झारखंड में पाये जाने वाली मुख्य जनजातियाँ: (List of tribes in Jharkhand with their details)

Adivasi tribes in Jharkhand
Adivasi tribes in Jharkhand

Culture, History & Lifestyle

 

जनजाति का नाम विवरण निवास स्थान
भतूदी भतूदी जाति ओडिशा के उत्तर पश्चिमी भाग में पाई जाती है इसके साथ साथ  ये जाति झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी इनकी उपस्थिति देखने को मिलता है | ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल
भूमिज  झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार राज्यों में भूमिज जनजाति पाई जाती है । वे भूमिज भाषा बोलते हैं, जो एक ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषा भी बोलते हैं झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार
असुर  ऑस्ट्रोएशियाटिक जाति  की गिनती में असुर लोग एक छोटी  हैं, जो झारखंड के गुमला, लोहरदगा, पलामू और लातेहार जिलों में मुख्य रूप से रहते हैं। कुछ अल्पसंख्यक इनसे जुड़े पड़ोसी राज्यों में भी निवास करते हैं। झारखंड (गुमला, लोहरदगा, पलामू, लातेहार)
बेड़िया बेड़िया जाति का मानना है कि वे मोहदीपहार से उत्पन्न हुए थे। कुछ मान्यता के अनुसार, वे कुम्हार जाति के बाहर हुए लोग हैं, जो घूमते हुए कुम्हार के रूप में जाने जाते हैं। झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल
बैगा बैगा जाति मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में पाई जाती है, और झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा में भी कुछ संख्या में निवास करती है। “बैगा” का अर्थ “जादूगर” या “औषधि आदमी” होता है। मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा
छेरो छेरो जाति बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में पाई जाती है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश
बिरजिया बिरजिया जाति की अपनी भाषा है, जिसे बिंझिया या बिजोरी भी कहा जाता है। यह भाषा मुण्डा भाषा से संबंधित मानी जाती है। ओडिशा, झारखंड
चिक बड़क चिक बड़क जनजाति झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पाई जाती है। यह समुदाय पारंपरिक रूप से बुनकर रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा
बिंझिया बिंझिया जनजाति ओडिशा और झारखंड में पाई जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, इनकी जनसंख्या लगभग 25,835 है। ओडिशा, झारखंड
बिरहो बिरहो लोग झारखंड राज्य में घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी लोग हैं। वे बिरहो भाषा बोलते हैं, जो मुण्डा भाषा समूह से संबंधित है। झारखंड
बंजारा बंजारा जाति, जिसे लबाना और लामबाड़ी भी कहा जाता है, ऐतिहासिक रूप से घुमंतू व्यापारिक जाति है। इनकी उत्पत्ति राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र से मानी जाती है। राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा
गोंदी गोंदी जनजाति एक द्रविड़ियन जाति है, जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार और ओडिशा राज्यों में पाई जाती है। गोंदी भाषा द्रविड़ियन गोंदी भाषा से संबंधित है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा

 

Adar Market आंखिर 15 किलोमीटर से पैदल क्यों आते हैं : आदर बाजार

Adar Market एक पारंपरिक स्थनीय बाजार: आदर बाजार

 


मवेशी बाजार

Local Market Adar : झारखंड के पारंपरिक स्थानीय बाजार  की बात करें तो इन बाजारों में वस्तुएं व अन्य खाद्य उत्पादों एवं जनजातियों द्वारा बनाए गए उत्पादों का विशेष प्रदर्शन होता है जहां खरीद बिक्री किया जाता है आपको बता दे कि झारखंड के स्थानीय बाजार साप्ताहिक होता है

और सप्ताह में किसी एक दिन लगता है जहां पर लोग एक सप्ताह का पूरा सामान खरीद बिक्री कर अपने जीविका चलाने के लिए खरीद कर ले जाते हैं झारखंड के पहाड़ों में बसे आदिम जनजाति एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र पर इस तरह के बाजार आपको देखा जा सकता है जहां पर साप्ताहिक तौर पर खरीद बिक्री कर अपने दैनिक उपयोग के लिए सामान खरीद कर ले जाते हैं एवं एक सप्ताह तक उसका उपयोग करते हैं

आदर बाजार

आदर बजार आज से लगभग 240 साल पूर्व  से इस जगह पर एक छोटा सा चार समूह का खरीद बिक्री किया जाता था एक बुजुर्ग कहना है कि हमारे दादाजी बताते थे कि इस जगह पर एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था इस पेड़ के नीचे चार-पांच लोग का समूह बैठकर छोटा-मोटा सब्जी बैल बकरी अन्य सामान की खरीद बिक्री किया जाता था दिन प्रतिदिन व्यतीत होता गया  और समय के साथ साथ हर चीज बदलता चला गया  और आज यहां  बड़े भू भाग में ये बाजार लगता है | उस समय  कौड़ी के रूप में उपयोग किया जाता था दिन प्रतिदिन व्यतीत के साथ अंग्रेजों के शासनकाल के बाद धीरे-धीरे इस जगह से रास्ता का निर्माण किया गया और फिर हर चीज में बदलाव देखने को मिलने लगा |

आदर बाजार का महत्व (Adar Market)

आदर बाजार  Adar market में खाद्य सामग्री से लेकर पहनने के लिए चप्पल जूता एवं बर्तन के अन्य सामानों के साथ-साथ पारंपरिक स्थानीय लोगों के मिट्टी के बर्तन, बंबू का बनाया हुआ बुनकर जंगलों से लाया हुआ सांग इस तरह के इस बाजार में आपको पारंपरिक एवं ट्रेडिशनल देखने को मिलता है आपको बता दे की आदर बाजार झारखंड के उन सुदरवर्ती क्षेत्र में से एक है जहां आदिवासी बहुत क्षेत्र कहा जाता है कहा जाए तो आदर बाजार इन क्षेत्रों का एक लाइफ लाइन है जो अपने दैनिक उपयोग की सारी चीज साप्ताहिक हाट में मिल जाती है

और लोग इस साप्ताहिक बाजार weekly Market पर आकर अपना जीविका के साधन आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से लोगों का यह एक रोजगार का साधन भी है इस तरह से हम कर सकते हैं कि आदर बाजार आदिवासी बहुत क्षेत्र में एक नया आयाम एवं एक सुविधा का केंद्र है जहां लोग शहर ना जाकर बाजार से खरीद बिक्री कर अपने गांव तक ले जाते हैं आज भी इस इलाके में कई ऐसे गांव है जो जंगल के सुदरवर्ती क्षेत्र पर है जो 10-15 किलोमीटर से पैदल चलकर बाजार आते हैं और इस साप्ताहिक हाट में अपने जरूरी का सामान खरीद बिक्री कर चले जाते हैं और एक सप्ताह का इंतजार करते हैं

आदर बाजार सप्ताह में रविवार को लगता है  SUNDAY MARKET

पारंपरिक एवं स्थानीय हॉट local Market होने के साथ-साथ आदर बाजार एक निश्चित दिन को लगता है जो कि रविवार होता है और इस रविवार sunday को साप्ताहिक बाजार जिसे की इतवार बाजार कहा जाता है इस बाजार में लगभग 50 किलोमीटर दूर से लोग इस बाजार में अपना सामान को बिक्री करने के लिए आते हैं जिसमें से लोहरदगा ,गुमला जैसे जिले भी शामिल है इस बाजार की खास बात यह भी है कि यह झारखंड के सबसे ऊंचे स्थान नेतरहाट जाने वाले रास्ते में पड़ता है जिससे कि जो लोग नेतरहाट को Visit करने के लिए जा रहे हैं मुख्यतः रविवार के दिन वह इस बाजार को पार कर कुछ ना कुछ सब्जी सामान खरीद कर ले जाते हैं

पारंपरिक वस्तुएं एवं खरीद बिक्री

BAMBO CARFTING (बांस का हस्तकला )

इस बाजार में आपको पारंपरिक वस्तुओं जैसे मिट्टी के बर्तन बस के कटोरी गंगू हाल हसुआ, तंगी बैसला, धन रखने वाला छठ का दौरा रस्सी जैसे अंको पारंपरिक वस्तुएं इस बाजार में आपको देखने को मिलता है और लोग इसकी खरीद बिक्री करते हैं उसके साथ-साथ आपको अन्य वस्तुएं जैसे बर्तन कुर्सी टेबल कपड़े चप्पल जूते लोहे के औजार रबर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट आइटम जैसे अन्य चीज इस साप्ताहिक घाट में मिल जाता है

बैल और बकरी की भी खरीद बिक्री किया जाता है

साप्ताहिक बाजार होने के साथ-साथ आदर बाजार अपने पुराने मवेशी बाजार के लिए भी जाना जाता है, इस बाजार में आपको बैल बकरी की खरीद बिक्री भी किया जाता है लोग दूरदराज से गांव से बैल और बकरी की खरीद बिक्री करने के लिए आते हैं एवं उचित दाम में यहां से खरीद कर ले जाते हैं, बरसात के दिन में बैल बकरी का दाम बढ़ जाता है जिस वजह से ज्यादा दाम मिलने के कारण लोग दूर तरह से बटलर बकरी को खरीद बिक्री करने के लिए लाते हैं जिससे कि दो पैसा ज्यादा उनको मिल जाता है

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बाजार में मिलता है या पकवान जो लोगों को बहुत भाता है

जी हां बाजार में स्थानीय पकवान जैसे पकौड़ी dhuska,समोसा जलेबी लकठो, बालूशाही नमकीन जैसे पकवान छोटे-छोटे झोपड़ी में बने होटल बनाया जाता है बाजार समाप्त होने के उपरांत लोग अपने घर के लिए इस तरह के पकवान खरीद कर घर ले जाते हैं वह घर पर अपने बच्चों के साथ मिलकर खाते हैं

इसके साथ-साथ इन क्षेत्रों में लगने वाले अन्य बाजार भी इस लिस्ट में शामिल है जिसमें अपने पारंपरिक एवं शहरी क्षेत्र में लगने वाले बाजार जिस्म की खरीद बिक्री होता है उसमें से कुछ गांव के अंदर एवं कुछ शहर और कुछ पहाड़ों के बीच लगती है दिन में से बिशनपुर बाजार,बनारी बाजार,चैनपुर बाजार, पैसों बाजार, पाठ बाजार, सेरेंगदाग बाजार , गुमला बाजार, लोहरदगा बजार आदि यह सभी बाजार में कुछ ना कुछ पारंपरिक खाद्य सामग्री से लेकर पहनावा और वस्तुएं आपको देखने को मिल जाएगी।

Rose Island Getalsud Dam Ranchi तेजी से वायरल हो रहा यह torist place

getalsud dam ranchi

Rose Island Ranchi Jharkhand इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा यह torist place

Rose Island Getalsud Dam Ranchi

जी हां दोस्तों इन दोनों रांची के ओरमांझी से सटे Rose Island रोज आयरलैंड जो की काफी चर्चित है जो Getalsud डैम में स्थित है लोगों में काफी उत्साह है इसे देखने के लिए तो लोग यहां पर वीकेंड छुट्टी हो या फिर प्रतिदिन यहां पर इस प्लेस को visit करने जा रहे हैं जिसे रोज आईलैंड कहा जाता है इसके बिरसा मुंडा बायोलॉजिकल पार्क है जो को नेरेस्ट और मांझी में स्थित है आज इस लेख मैं आपको बताएंगे कि किस तरह आप रोज आइलैंड आ सकते हैं और यह किस लोकेशन पर है इसको आप विजिट करके एक अच्छा खासा अपने परिवार के साथ समय व्यतीत कर सकेंगे। 

Rose Island 🏝️ जाने के रास्ते (Getalsud डैम View Point)

Rose Island Getalsud Dam Ranchiअगर आप रांची आए हो रांची के बाद आना चाहते तो रांची से आपको old हजारीबाग रास्ता रांची पटना मार्ग NH -20 पकड़ना होगा जिसके माध्यम से ओरमांझी पार्क से कुछ ही दूरी पर block चौक से right होते NH 320 रास्ता से जाना होगा । और कुछ ही दूरी पर इंटेक चौक से right घुसना होगा थोड़े से गांव के बाद आपको एक साल के वन जंगल मिलेगा जिसको पार करके आप सीधे rose Island प्लेस रोज आयरलैंड तक पहुंच सकते हैं चारों तरफ सफर तो पेड़ और बीच में पक्की रास्ता सीधे आप Getalsud डैम View Point के तरफ जा सकते हैं

 

Getalsud Dam के बारे में जानकारी

स्वर्ण रेखा नदी पर स्थित Getalsud dam झारखंड का सबसे बड़ा कृत्रिम डैम है और यह रांची से लगभग 20 किलोमीटर का दूरी पर उत्तर की ओर स्थित है इसी टाइम के एक छोर पर बिरसा मुंडा बायोलॉजिकल पार्क स्थित है इस डैम की लंबाई की बात करें तो लगभग 277वर्ग मिल है डैम का निर्माण 1971 में किया गया था और इसमें 07 फाटक है इसी dam से जो पानी निकलता है वह hundru fall निर्माण करते हुए जमशेदपुर से बहते हुए बंगाल के रास्ते समुद्र में जाकर मिलता है

कुछ लोग क्यों इसे Rukka dam भी कहते हैं

क्योंकि स्वर्णरेखा नदी में स्थित होने के कारण Rukka dam से साथ में सटा हुआ है और पश्चिम की ओर इसे Rukka डैम कहा जाता है और पूर्व की ओर से Getalsud Dam भी कहा जाता

Rose Island Getalsud Dam Ranchi Jharkhand Rose है

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कैसे पहुंचे 

  • यदि आप झारखंड के हैं तो सबसे पहले आपको राजधानी रांची आना होगा उसके बाद वहां से आपको ऑटो रिक्शा बस या फिर पर्सनल बाइक के माध्यम से सीधे आप रोज आइलैंड तक पहुंच सकते हैं
  • यदि आप झारखंड के बाहर से हैं तो आपको ट्रेन हवाई मार्ग और बस से आ सकते हैं
  • हवाई जहाज _झारखंड के बाहर से आ रहे हैं तो आपको रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरना होगा उसका वहां से आपको बोला टैक्सी या और भी साधन करके आप इस जगह तक पहुंच सकते हैं
  • ट्रेन से आने पर_ट्रेन से आने पर आपको रांची के रांची रेलवे स्टेशन में उतरना होगा वहां से आप ऑटो रिक्शा पर टैक्सी ओला कैसे माध्यम से आप हजारीबाग के रास्ते और औरमांझी पहुंच सकते हैं और इस खूबसूरत सा प्लेस को एंजॉय कर सकते हैं

 

 

 

अकबर ने क्यों नही कर पाया कब्ज़ा इस किले को Palamu kila, palamu fort in Latehar

palamu kila ka rahasya | palamu kila history in hindi

पलामू डाल्टनगंज शहर मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुराना किला एवं नया किला झारखंड के ऐतिहासिक किलो में से एक पलामू का 400 साल पुराना ऐतिहासिक धरोहर है कहा जाता है की इस किले को अकबर ने कब्ज़ा करने की कोशिश की थी पर वो नाकाम रहा  palamu four history

पलामू किला हिस्ट्री इन हिंदी  palamu kila history in hindi

दक्षिण पठार में स्थित palamu kila ka rahasya | palamu kila history in hindi  झारखंड राज्य अपने ऐतिहासिक स्थल एवं धरोहर के लिए जानी जाती झारखंड में कैसे पर्यटक स्थल है जहां पर लोग दूरदराज से इसके ऐतिहासिक हिस्ट्रिकल बातों को जानने के लिए आते हैं झारखंड के पलामू में स्थित लातेहार जिले में पलामू का किला के नाम से प्रसिद्ध किला लेकर ऐतिहासिक धरोहर है जिसे देखने के लिए लोग झारखंड के अन्य हिस्से एवं राज्य के बाहर से भी आते हैं एवं झारखंड अपने ऐतिहासिक गौरव के लिए जानी जाती है आज के इस लेख में आपको हम लातेहार जिला के पलामू का किला के बारे में बताएंगे

पलामू का किला का निर्माण किसने किया था Palamu kila daltongaj

लातेहार जिला मुख्यालय से सुंदर भारती क्षेत्र जंगलों के बीच में राजाओं के द्वारा निर्माण किया गया एक भव्य किला है था जो अब खंडहर के रूप में तब्दील हो गया है एक जो किला है वह मैदानी इलाका में है परंतु जो किला जंगल के बीचो-बीच है वह किला खंडहर में तब्दील हो चुका है कहा जाता है कि इस किला का निर्माण चेरो राजवंश के राजा गोपाल राय ने 1766 से 1770 के आसपास इसका निर्माण करवाया था

अपने प्राचीन गौरवशाली इतिहास के लिए भारत जानी जाती है ऐसे में भारत में कैसे ऐतिहासिक किले का निर्माण राजाओं के द्वारा किया गया था जिसके फल स्वरुप अनेक राज्यों में कैसे ऐतिहासिक किले हैं जो आज भी उनके ऐतिहासिक कहानी बयां करती हैं झारखंड राज्य में एक ऐसा किला है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे प्राचीन किलों में से एक है

और इसे पुराना किला भी कहा जाता है इसका निर्माण चेरो वंश के राजाओं ने किया था इस किले का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया है जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाया गया था जीरो वंश के राजाओं के द्वारा दो केले का निर्माण किया गया एक जो किला है वह मैदानी क्षेत्र में है और दूसरा किला पहाड़ी से सटे जंगल के बीच में किया गया है

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किले की भौगोलिक दृष्टिकोण

पलामू जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर का दूरी में स्थित दो खंडहर किले जिसको पुराना किला एवं नया किला के नाम से जानते हैं कहा जाता है कि पुराना किला जो चिरू राजवंश के निर्माण कल से पहले से यहां पर मौजूद था इसके लिए का निर्माण इस तरह किया गया था कि इसके तीन मुख्य द्वार थे एवं नए किले का निर्माण राजा मेदिनी राय के द्वारा किया गया था

पलामू किला का महत्व history of Palamu fort

लातेहार जिला में स्थित पलामू का किला झारखंड के ऐतिहासिक धरोहर में से एक है यदि आप इतिहास को पढ़ते हैं इतिहास को जानने की इच्छा रखते हैं तो आप ऐसे ऐतिहासिक चीजों से रूबरू हो सकते हैं जिसके लिए आप झारखंड के कई ऐसे किले हैं जहां आप जाकर विजिट कर सकते हैं और उसके ऐतिहासिक दृष्टिकोण को जान सकते हैं साथ ही

पलामू किला पहुंचने के रास्ते

पलामू की न पहुंचने के लिए आपको बस ट्रेन एवं हवाई जहाज व्यक्तिगत गाड़ी से आप इस जगह आ सकते हैं
रेलगाड़ी से कैसे आए _यदि आप रेलगाड़ी ट्रेन के माध्यम से इस जगह घूमने के लिए आ रहे हैं तो सबसे पहले आपको डालटनगंज रेलवे स्टेशन में उतरना होगा उसके बाद वहां से आप ऑटो बस टैक्सी कर सकते हैं
बस से कैसे आए यदि अब बस से आते हैं तो आपको राजधानी रांची के बस अड्डे पर उतरना होगा वहां से आपको कई सारे बसे मिल जाते हैं डायरेक्ट डाल्टनगंज के लिए डालटेनगंज आने के बाद आपको यहां से छोटी-छोटी गाड़ी मिल जाएगी
हवाई जहाज से कैसे आए

झारखंड में कई ऐसे रहस्य मई एतेहासिक धरोहर मोजूद हैं जिन्हें आप जान सकते है | पलामू किला की और अधिक जानकारी के लिए visit करे https://palamu.nic.in/

 

 

bokaro in which state | bokaro me ghumne ka jagah

bokaro in which state | bokaro me ghumne ka jagah

बोकारो स्टील सिटी में भारत का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र  होने के साथ-साथ बहुत अधिक मात्रा में लोहे का उत्पादन होता है bokaro me ghumne ka jagah की बात करे तो यह दामोदर नदी के किनारे बसा यह भारत का झारखंड राज्य है  bokaro in which state तो आपको बता दे यह झारखंड राज्य में स्थित  स्टील  शहर है और इसके आसपास में हजारीबाग धनबाद ,गिरिडीह ,धनबाद जैसे जिला से सटा हुआ है

बोकारो में प्राकृतिक सम्पदा भरी पड़ी है जिसके चलते बोकारो पर इस्पात संयंत्र स्थापित किया गया है बोकारो नगरी में खनिज संपदा में सबसे महत्वपूर्ण अयस्क मैंगनीज कोयला जैसे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं इस वजह से यहां पर उद्योग स्थापित किया गया है

और यहां से उत्पादन किए गए लोहा पूरे भारत में सप्लाई किया जाता है  रेल की गाड़ी से सफर करते समय आप रास्ते से ही बोकारो स्टील  पावर प्लांट देख सकते हैं  जब पर्यटक इस जगह घूमने के लिए आते हैं तो मुख्य आकर्षण का केंद्र यहां का बोकारो स्टील  पावर प्लांट है जिसे पर्यटक एक पर जरूर देखते हैं इसके साथ-साथ अन्य ऐसे पर्यटक स्थल है इसके बारे में आगे विस्तार से बताते हैं

बोकारो का आकर्षण केंद्र  Attractions near Bokaro Steel City,Jharkhand 

पर्यटन के दृष्टिकोण से बोकारो का सबसे आकर्षक का केंद्र यहां का स्टील पॉवर  प्लांट है जिसे लोग देखे बिना नहीं जा सकते हैं साथ ही बोकारो के अन्य  पर्यटन स्थल मौजूद हैं जिसमें से प्राकृतिक कृत्रिम एवं पहाड़ों में बस्ती सौंदर्य जिसे देखने के लिए लोग दूरदराज से आते हैं बोकारो के मुख्य पर्यटक स्थल best tourist place in Bokaro in Hindi जिसके नाम तेनुघाट डैम, गरगा बांध, बोकारो थर्मल पावर प्लांट,सिटी पार्क, जवाहर नेहरू जैविक उद्यान,शिखरजी मंदिर, आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है

  1. तेनुघाट बांध: दामोदर घाटी निगम का एक परियोजना –बोकारो जिले के तेनुघाट प्रखंड में स्थित तिरंगा दम 1978 ईस्वी में दामोदर घाटी निगम के तहत इसका निर्माण किया गया था और यह दामोदर नदी पर अवस्थित है पर्यटन के दृष्टिकोण से तेनुघाट बांध एक पर्यटक स्थल है और यहां पर हर साल पर्यटक भारी संख्या में आते हैं
  2. गरगा बांध: प्रकृति सदस्य परिपूर्ण  -शहर  मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर का दूरी पर स्थित दामोदर घाटी की सहायक नदी गर्ग बंद एक पिकनिक स्पॉट है जहां लोग पिकनिक मनाने के जाते हैं आते रहते हैं बांध के आसपास हर बड़े पेड़ पौधे एवं हरियाली होने की वजह से इस जगह पर लोग घंटो जाकर समय व्यतीत करते हैं यह बांध मुख्ता इस्पात संयंत्र के साथ-साथ यहां के निवासी की खेतों की सिंचाई के साथ-साथ के पानी की समस्याओं को देखते इसका निर्माण किया गया था
  3. बोकारो थर्मल पावर प्लांट: लोहे की नगरी बोकारो इस्पात संयंत्र के नाम से प्रसिद्ध बोकारो स्टील नगरी bokaro still city के नाम से जाने जाते हैं जिसे बोकारो स्टील  कहा जाता है पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी स्थापना की थी और यह भारत का सबसे बड़ा स्टील पावर प्लांट है जिसे देखने के लिए पर्यटक हर वर्ष काफी संख्या में आते है
  4. सिटी पार्क शहर के बीचो-बीच स्थित बोकारो सिटी पार्क शहर के लोगों के लिए एक मनोरंजन पार्क है जिसके अंदर एक कृत्रिम झील का निर्माण किया गया है हरा भरा पेड़ पौधे पार्क फूल वीकेंड छुट्टी हो या नया साल लोग इस जगह भारी संख्या में आते हैं और अपना बहुमूल्य समय व्यतीत करते हैं
  5. जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान: शहर के लोगों के लिए मनोरंजन का एक विभिन्न जीव जंतु से भरा जैविक उद्यान जवाहरलाल नेहरू जैविक उद्यान शहर में देखने का सबसे आकर्षण का केंद्र है जहां आपको विभिन्न प्रकार जीव जंतु देखने को मिलते हैं जैसे चिता ल सियार हरेन चिड़िया पशु साथी जैविक उद्यान में बच्चों के लिए टॉय ट्रेन पर चलाया जाता है जहां बच्चे इसका सुविधा लेते हैं कृत्रिम झील में वोटिंग की व्यवस्था की गई है जिसमें लोग नौकायन या वोटिंग का मजा लेते हैं
  6. शिखरजी धाम शिखरजी मंदिर : आकर्षक अलौकिक एवं वास्तु कला का शानदार प्रदर्शन पारस पहाड़ियों की चोटी पर स्थित शिखरजी मंदिर जैन धर्म संप्रदाय के लिए प्रसिद्ध मंदिर है जहां पर जैन संप्रदाय के लोग का तीर्थ स्थल है और यह बोकारो के प्रसिद्ध स्थलों से एक है इस मंदिर की खासियत है कि यहां की वास्तुकला काफी बेहतरीन बनाया गया लोग इसका काफी तारीफ करते हैं लोग जब इस मंदिर पर आते हैं तो इसकी वास्तुकला एवं नकाशी को देखकर इसके प्रशंसा करते नहीं थकते बेहद ही आकर्षक एवं अद्भुत कलाकारी का यह उम्दा कलाकारी का एक छाप है लोग इस पर्यटक स्थल में धार्मिक श्रद्धा के साथ यहां आते हैं और पूजा पाठ करके जाते हैं

बोकारो कोन से राज्य में है

झारखंड राजधानी रांची से 122 किलोमीटर का दूरी पर स्थित बोकारो जिस लोहे की नगरी या बोकारो स्टील सिटी कहा जाता है लोग गूगल में क्वेश्चन करते हैं bokaro steel plant in which state तो आपको बता दे की बोकारो भारत के झारखंड राज्य में स्थित है जहां भारत का सबसे अधिक लोहा उत्पादन किया जाता है और भारत में हर जगह इसका निर्यात किया जाता है

बोकारो क्यों प्रसिद्ध है

इस्पात नगरी के नाम से मशहूर बोकारो स्टील सिटी इस्पात उत्पादन के लिए मशहूर है 1965 ईस्वी में सोवियत संघ के द्वारा इसका स्थापित किया गया था स्थापित किया गया था यह देश का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्रों में से एक है

बोकारो  में घूमने का सबसे अच्छा समय

बोकारो में घूमने के लिए जो समय है वो माह सितंबर से मार्च तक माना जाता है  क्योंकि इस समय मौसम अनुकूल रहता है किसी भी पर्यटन स्थल जाने के लिए साथ ही बोकारो  मौसम bokaro weather यहाँ की 20 डिग्री  से 8 डिग्री तक लगभग रहती है इसलिए बोकारो में घुमने का सबसे अच्छा ठण्ड से गर्मी आने तक का  माना गया है

कैसे आ सकते हैं बोकारो शहर

वैसे तो किसी भी पर्यटक स्थल में जाने के लिए आपको हवाई मार्ग रेल मार्ग सड़क मार्ग से जाना होता है आपको बता दे कि यदि आप इस जगह आना चाहते हैं तो आपको हाय मार्ग से राजधानी रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डा पर उतरना पड़ता है फिर वहां से आपको 122 किलोमीटर की दूरी तय करके बोकारो शहर आना पड़ता है अब बोकारो शहर आने के लिए या तो अप्रैल गाड़ी से आ सकते हैं या फिर आप बस से आ सकते हैं

यदि अप्रैल गाड़ी चाहते हैं तो राजधानी रांची के रांची रेलवे स्टेशन से आपको बोकारो रेलवे स्टेशन आना होता है और यदि आप बस जाते हैं तो रांची के बस स्टैंड खादगढ़ा बस स्टैंड से आप बस पड़कर सीधे बोकारो बस स्टैंड सेक्टर 12 मुख्य स्टॉप पर आ सकते हैं

निष्कर्ष

तो आज के इस लेख में bokaro tourist place in hindi ,bokaro top Attractions के बारे में आपको बताने की कोशिश की है जिसमे आप बोकारो के विभिन्न पर्यटन स्थल के बारे में जानें आशा करता हूँ कि आज के इस  लेख में आपको बोकारो के बारे में जानने को मिला होगा ऐसे ही अन्य लेख के  बारे में जानने के लिए हमारे लेख को अब पढ़ सकते हैं और हमें फ़ॉलो भी कर सकते हैं

FAQ

बोकारो बांध किस नदी पर स्थित है?

बोकारो  दामोदर नदी के किनारे स्थित है

तेनुघाट बांध किसने बनवाया था?

बिहार सरकार के द्वारा 1978 में दामोदर घाटी निगम परियोजना के लिए इस बांध का निर्माण किया गया था

 

swarnrekha nadi kahan hai | स्वर्णरेखा नदी कहां से निकलती है

Swarnrekha nadi Jharkhand | स्वर्णरेखा नदी कहां से निकलती है

swarnrekha nadi kahan hai झारखड़ में एक ऐसा नदी है जहां सोना निकलता है जी हम बात करें दक्षिण छोटानागपुर के पठारी भाग स्थित झारखंड की राजधानी रांची से 16 किलोमीटर की दूर नगड़ी स्थित एक गांव के पास एक कुआं से नदी की धार से पानी बहते हुए पूरब की दिशा में खरसावां सराय किला जिला से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से होते हुए यह उड़ीसा बालासर में जाकर बहती है कहा जाता है

कि इस नदी से सोने प्राप्त किया जाता है जिसे लोग अपने आजिविका का साधन अपना कर भरन पोषण भी करते हैं कुछ लोगों का कहना है कि यहां रेत में सोने के कण पाए जाते हैं इस वजह से इस नदी को स्वर्ण रेखा नदी नाम कहते है और अधिक से गहराई जाने के लिए जब हमने इसका पता लगाया तो पता चला कि संरक्खा नदी सहायक नदी करकेरी नदी है जहां पर सोने के कण पाए जाते हैं इस वजह से हो सकता है कि स्वर्ण रेखा के नदी के रेत में स्वर्ण का कण पाया जाता होगा है

Swarnrekha nadi स्वर्णरेखा नदी इतिहास  | स्वर्ण रेखा नदी के बारे में रोचक तथ्य क्या हैं

स्वर्णरेखा नदी के इतिहास की बात करें तो स्वर्ण रेखा नदी के बारे में रोचक तथ्य तो बता दे की इसकी इतिहास महाभारत काल से किया जाता है कहा जाता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान जब पांडव इस जगह से जा रहे थे तो उसमें द्रोपती को प्यास लगी थी तो उसी समय अर्जुन ने जमीन में बाण मारकर कुंवा नुमा गढ़ा किया और उससे पानी निकलने लगा इसी तर्ज पर इस नदी का उदगम इसी कुंवा नामक से बहते हुए लगातार अभी तक बह रही है

चांडिल डैम स्वर्णरेखा नदी swarnrekha nadi पर बनाई गई है चांडिल पर्यटन

झारखंड के साथ-साथ बंगाल और उड़ीसा में बहने के कारण स्वर्णखा नदी झारखंड की बड़ी नदियों में से एक है और यह नगरी गांव में स्थित एक चूवा नमक गड्ढे से निकलकर बहती है इस नदी की कुल लंबाई की बात करें तो लगभग 474 किलोमीटर है जो कि बंगाल में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है स्वर्णरेखानदी के पानी को जमा कर चांडिल डैम बनाया गया है चांडिल डैम पर्यटन के लिहाज से बहुत ही देखे जाने वाले पर्यटन में से एक है जहां पर पर्यटक हर समय इस डैम का नजारा देखने के लिए इस जगह आया करते हैं और यह झारखंड के सरायकेला खरसावां में जिला में पड़ता है

स्वर्णरेखा नदी कहां से निकलती है |swarnrekha nadi kis gaon se nikalti hai

स्वर्णरेखा नदी की खास बात है कि इसे सोने की नदी भी कहा जाता है लोग इस नदी के रेत/बालू को छान-छान कर अलग करते हैं और उससे छोटे-छोटे कण में सोने निकाला जाता है और उस सोने को निकाल कर बेचते हैं और उससे पैसे कमाते हैं

स्वर्णरेखा नदी swarnrekha nadi  के किनारे बसे शहर

पश्चिम से पूर्व की ओर टेढ़े-मढ़ी आकार से बहते हुए स्वर्णरेखा नदी झारखंड कई शहर होते हुए बहती है जो झारखंड की काफी विकसित शहर में से एक है जैसे ,रांची,जमशेदपुर, घाटशिला,आदि साथ ही और अधिक details के लिए आप  subarnarekha nadi  के बारे  google मैप में सर्च करें subarnarekha river map

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स्वर्णरेखा नदी  Gold River of India क्या झारखंड की स्वर्णरेखा नदी में बहता है …

किन-किन राज्यों से होकर गुजरती है

स्वर्णरेखा नदी राज्य के कई शहरो से गुजरने के साथ साथ कई राज्य से गुजरता है लोग google से सवाल करते हैं स्वर्णरेखा नदी किस राज्य में है और कोन कोन राज्यों से होकर बहती है तो यह झारखंड,बंगाल, उड़ीसा आदि राज्य से होते हुए सीधे पश्चिम बंगाल के खाड़ी में गिरती है । यह नदी किसी अन्य नदी में नही मिलती बल्कि सीधे बंगाल की खाड़ी में जा गिरती है।

संक्षेप:_इस लेख में अपने स्वर्णरेखा नदी के बारे में जाना जो कि झारखंड के रांची में स्थित नगरी गांव के पास इसका उद्गम स्थल है आशा करता हूं कि आर्टिकल्स में आपको स्वर्ण रेखा नदी के बारे में जानने को मिला | आशा करते हैं की आपलोगों को इसकी जानकारी अच्छी लगी होगी |

unique places to visit in kerala | best places to go in december 2024

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केरल टूरिस्ट प्लेस हिंदी में Kerala Tourist Place in Hindi

भारत के दक्षिण में स्थित केरल भारत का एक राज्य हैं जहाँ  पर्यटन के अपार संभावनाये  हैं वैसे में यदि आप places to visit in Kerala with family , best places to go in december और  unique places to visit in Kerala केरल में घुमने की सोच रहें हैं तो आज हम इस लेख में केरल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के बारे में बताएँगे जिसमे आप अपने परिवार के साथ top places to visit in Kerala with family के बारे में जानेंगे |

वैसे तो भारत में घूमने के लोग अक्सर योजना बनाते हैं परंतु सही जानकारी न होने की वजह से लोग पसंदीदा स्थल नही जा पाते हैं आप  भी कई ऐसे जगहों में  जाना चाहते हैं परंतु आप को भी  उस जगह के बारे में जानकारी नहीं होने की वजह से आप भी नहीं जा पाते हैं यदि बात करें केरल की तो लोग गूगल से सवाल करते हैं कि केरल की राजधानी कहां है तो आपको बता दे कि केरल  की राजधानी तिरुवनंतपुरम जिसे त्रिवेंद्रम भी कहा जाता है है

unique places to visit in Kerala केरल टूरिस्ट स्पॉट

केरल दक्षिण भारत के सबसे खूबसूरत जगह और पर्यटन स्थल में से एक है जहाँ पर खूबसूरत समुद्री बीच , वॉटरफॉल्स, प्राचीन मंदिर ,हिल स्टेशन, चाय बागान ,धार्मिक स्थल ऐतिहासिक जगह भरी  पड़ी है जहाँ आप अपने परिवार के साथ केरल में घूमने का एक अलग रोमांचित एक्सपीरियंस ले सकते हैं केरल जहाँ पर कॉफी, चाय, काजू ,काली मिर्च खाद्य चीजो की खेती बहुत अधिक होती है

वैसे में आप अपने परिवार के साथ दक्षिण भारत की यात्रा का योजना बना रहे हैं तो आपके लिए केरल एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है जहाँ पर बहुत अधिक एड्वेंचर सुकून एतिहासिक दर्शन एवं मूर्ति कला की बेहतरीन नक्कासी देख पाएंगे आप अपने परिवार को आनंदित कर सकते हैं ये तो कहा जाता है भारत के दक्षिण में मौसम हमेशा गर्म ही रहता है इस वजह से मानसून के दिनों में केरल घूमने के लिए आप के लिए एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है अगर आप टूरिज्म गाइड की मदद लेते हैं तो आपको केरल के बेहतरीन जगह पर आपको टूर कराते हैं केरल में से कई जगहें हैं

जैसे मुन्नार वायनाड ,कोवलम बीच ,अलपी, थेक्कड़ी, कोच्चि,नेल्लीयमपैथी,बेकल कोझिकोड जैसे प्रमुख यहाँ के पर्यटन स्थल में से एक है जहाँ पर्यटक बहुत अधिक संख्या में इस जगह पर आते जाते रहते है

 

best places to go in december 2024 केरल में घूमने की प्रसिद्ध जगह कौन-कौन सी हैं

यदि आप केरल में घुमने की योजना बना चुके हैं तो आपको आज केरल में घुमने की जगह बेहतरीन tourist place  of Kerala   एवं  केरल के 07  प्रसिद्ध जगहों के बारे में बताते  हैं

कुमारकोम बीच

1.कुमारकोम बीच

यदि आप समुद्र के बीच में एक शांत वातावरण में बैठकर घंटो बिताना चाहते हैं और एक अनुभव महसूस करना चाहते हैं तो केरल के कुमारकोम बीच पर आपका स्वागत है यहां पर कई स्थान है जहां आप अपने एकांत समय को कुछ लम्हे व्यतीत कर सकते हैं यहां पर कई एक्टिविटीज है जहां पर आप अपने दिनचर्या के तनाव भरी जिंदगी को फ्रेशनेस कर सकते हैं कुमारकाम बीच में आपको तैराकी वाटर पोलो वॉलीबॉल इस कॉलिंग जैसे अन्य गतिविधियां शामिल है जो यहां पर आपको मिल जाएंगे साथ ही समुद्र के किनारे कई ऐसे छोटे-छोटे रिजॉर्ट हैं मसाज पार्लर है छोटे-छोटे कैसे दुकान हैं जहां आप अपने बेहतरीन टाइम पास कर सकते हैं

त्रिशूर

2.त्रिशूर

केरल की त्रिशूर शहर भगवान शिव  के तीन मंदिरों वाला शहर जिसे त्रिशूर के नाम से जाना जाता है इस जगह पर धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों का एक विशेष महत्व है यह एक धार्मिक शहर है और यहां पर कई प्राचीन मंदिर भी हैं त्रिशूर केरल के शास्त्री प्रदर्शन कला धार्मिक और प्रसिद्ध त्योहार के लिए भी प्रसिद्ध है इस जगह पर प्राचीन काल सभ्यता को देखने के लिए लोग विदेश से भी यहां पर आते हैं कहा यह भी जाता है कि त्रिशूल को आधिकारिक तौर पर सांस्कृतिक राजधानी भी कहते हैं त्रिशूर के आसपास कैसे पर्यटन स्थल है

मुन्नार

3.मुन्नार

तिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी व सबसे बड़े शहर होने के साथ साथ तिरुवनंतपुरम अपने आकर्षक समुद्र तट को ले जाने जाती है केरल की सबसे बड़ी हिंदू मंदिर भी इसी जगह स्थित है और इस मंदिर में भगवान श्री पद्मनाभस्वामी की मूर्ति स्थापित है तिरुवनंतपुरम अपने बेहतरीन पर्यटन स्थलों के लिए भी जानी जाती है जिसमे वेल्ल्यानी झील त्रिवेन्द्रम का सबसे बड़ा झील है जहाँ पर्यटक दूर दूर से आते हैं  इस शहर में एक बड़े संग्रहालय भी मौजूद है जहाँ केरल राज्य के विभिन जगहों और युगों के संगीत वाद्यात्र रखे गये हैं जो प्रेरणा के श्रोत हैं | यहाँ की खुबसूरत बीच लोगो को केरल आने को मजबूर कर देती हैं

कोवलम बीच केरला

4.कोवलम बीच केरला

नारियल के पेड़ से घिरा हुआ यह कोवलम बीच केरल की  राजधानी तिरुवनंतपुरम से 16 किलोमीटर दूर स्थित एक खूबसूरत सा समुद्र का बीच है जो बेहद आकर्षक का केंद्र है लोग इस बीच पर जाना पसंद करते हैं और भर भर के लोग इस जगह पर जाते हैं इस बीच पर कई एक्टिविटीज आपको देखने को मिलते हैं जिसमें आप इसका फायदा उठा सकते हैं यदि आप मसाज के सौकिंग है तो यहां पर आपको मसाज मालिश धूप सेकने की चेयर में बैठने के लिए छोटे-मोटे रिजॉर्ट जैसे कई आकर्षण के केंद्र है जहां लोग आकर इंजॉय करते हैं लोग अक्सर वीकेंड छुट्टी में ऐसे स्थान पर आते हैं और अपना बहुमूल्य समय अपने आप को देते हैं

कोझीकोड केरल

5.कोझीकोड केरल

कोझिकोड पर्यटक स्थल केरल के सबसे बेहतरीन जगह में से एक मानी जाती है इस जगह पर आपको काली मिर्च रबर कॉफी काजू उत्पादन बहुत अधिक मात्रा में होते हैं आप इसे इसका केंद्र भी कर सकते हैं कोझीकोड में बेहतरीन समुंद्र की बीच है जहाँ पर लोग अपनी दैनिक दिन चर्या की तनाव पूर्ण जीवन को इस जगह जाकर एक शुकून महसूस कर एक काफी समय दिन बिताते हैं आप वहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त का भी नजारा बहुत अच्छा देख सकते हैं कहा ये भी जाता है कि बास्कोडिगामा ने सबसे पहले इसी कोझिकोड कोर्ट के बंदरगाह बीच पर उतरा था और भारत की खोज की थी इसलिए इस जगह का अपना एक महत्त्व है

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भारत की सबसे बेहतरीन tourist place में केरल का स्थान अवल है केरल में सबसे ज्यादा पर्यटक मुन्नार शहर में आते हैं आपने अगर google किया होगा तो आपको पता होगा की दक्षिण भारत की सबसे बड़ा चाय बगान भी मुन्नार में स्थित है साथ ही मुन्नार में कई ऐसे adventure एक्टिविटी जैसे वाइल्ड life स्पोटिंग ट्रेकिंग,हाईकिंग,भी इस जगह मौजूद हैं जहाँ पर्यटक काफी अधिक मजे करते हैं

मुख्यत: ये जगह कपल के लिए best option हो सकता है क्योकिं यहाँ पर गगन छूता पहाड़ और टॉप हिल जगह यहाँ की प्राकृतिक अनुभूति आपको अपने जीवन की एक नई अहसास,रोमांचित  कर सकती है  इसलिए इस जगह पर शादी शुदा नए जोड़ी लोग काफी आते हैं  यहाँ ठहरने के कई रिसोर्ट भी हैं जहाँ आप रुक सकते हैं इसके साथ यदि और अधिक जानकारी चाहते हैं तो Kerla टूरिज्म वेबसाइट    https://www.keralatourism.org कर सकते हैं

FAQ-

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