ramrekha dham temple रामरेखा धाम राम सीता वनवास के दौरान इस जंगल …

  सिमडेगा मुख्यालय से लगभग 26  किमी दूर स्थित ramrekha dham temple रामरेखा धाम राम सीता वनवास के दौरान इस जंगल पर कुछ समय व्यतीत किये थे यह  एक पवित्र स्थान है। यह कहा जाता है कि भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण ने चौबीस वर्षों के बनवास के दौरान इस स्थान का दौरा किया था और कुछ समय तक यहीं रहे थे। पुरातात्विक संरचनाओं जैसे अग्नि कुंड, चरण पादुका, सीता चूल्हा और गुप्त गंगा से पता चलता है कि उन्होंने बनवास काल में इसी रास्ते पर चले थे।

यदि आप  रामरेखा धाम गए हैं तो आप देखे हैं  एक झुकी हुई गुफा में स्थित है, और भगवान राम, मां सीता, लक्ष्मण, हनुमान और भगवान शिव के मंदिरों को देखा। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां हर साल मेला लगता है। विभिन्न राज्यों और समुदायों से आने वाले लोग

रामरेखा धाम (Ramrekha Dham) का नाम क्यों लोकप्रिय है? क्या आप इसके बारे में जानते हैं?

14 वर्षों के वनवास के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस स्थान का दौरा किया था और वहाँ कुछ समय रहते थे। बानवास  की अवधि के दौरान उन्होंने इस मार्ग का अनुसरण किया, जैसा कि अग्निकुंड, चरण पंडुका, सीता चूल्हे और गुप्ता गंगा से पता चलता है। ramrekha dham रामरेखा धाम में लोगों ने भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और भगवान शिव के मंदिरों को देखा

झारखंड के सिमडेगा जिले में स्थित रामरेखा धाम  Ramrekha dham सबसे प्राचीन धार्मिक स्थान है।अगस्त मुनि के छोटे भाई अग्निजीविहा मुनि का आश्रम इस स्थान पर है।तीसरी शताब्दी से ही मुनि रामरेखा गुफा में तपस्या कर रहे हैं। उनके यज्ञों की आहुति आज भी अग्निकुंड में दिखाई देती है।

 रामरेखा नाम कैसे पड़ा 

Simdega के पावन धरती पर श्री राम के कदम से  सिमडेगा पावन हो गया है मान्यता यह है की जब श्री राम चंद्र जी १४ वर्ष की बनवास अवधि  कटते हुए जब इस जगह  पहुचे थे तब simdega के इसी जंगल में उन्होने कुछ दिन व्यतित किये थे  बरसात से बचने के लीये जब उन्हाने एक गुफा नुमा पत्थरों की मध्य जाकर रुके तो उनका सिर पत्थरों से टकराने लगा राम जी ने उन्ही  समय अपने तीर से उस पत्थर को एक लकीर खीच देते हैं और जगह बन जाता है कहा जाता है आज भी इस लकीर को वहां देखा जा सकता है

 रामरेखा धाम की खोज  बीरू राज वंश ने किया  Ramrekha Dham history 

बहुत पहले की बात है।वीरू राजवंश के १५वीं पीढ़ी के गंग वंशी राजा हरी राम सिंह देव ने जंगली जानवरों का शिकार करते हुए कौशलपुर परगना क्षेत्र में प्रवेश किया, जो विविध पशु पक्षियों और जंगली जानवरों से भरा हुआ था। उस स्थान पर थके हुए राजा ने निवास किया।

यहाँ पहुंचकर राजा को शांति का अनुभव हुआ और आराम करते हुए दूर से राम-राम का स्वर सुनाई दिया. राजा ने राम-राम कहा और आगे बढ़कर देखा कि एक गुफा में लता पत्रों और अन्य सामग्री से लगातार राम-राम का स्वर निकलता था। जब राजा गुफा में पहुंचा तो उसकी निगाह एक शिवलिंग पर पड़ी. वह दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ा और देखा कि एक काले शंख से निरंतर राम नाम निकल रहा है।रजा ने शंख को माथे पर लगाकर प्रणाम किया। करना।

और स्वयं शंख को अपने हाथों से बचाया।राजा फिर अपने महल में लौट गया. एक दिन, भगवान राम राजा के सपने में आए और उसे बताया कि जिस जगह पर उन्होंने शिवलिंग देखा था, वह हमारे द्वारा नवास काल में स्थापित किया गया था।और हमने अपना शंख वाही छोड़ दिया, जो दिन-रात मेरा नाम लेता रहता था।

Ramrekha dham Jharkhand में कार्तिक पूर्णिमा में  यहाँ भव्य मेला लगता है

झारखंड के अलावा यहां कई राज्यों से लोग आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु यहां पूजा करने आते हैं, हालांकि वे हर दिन पूजा करने आते हैं। रामरेखा धाम में हिंदुओं के अलावा अन्य समुदायों में भी आस्था है। अन्य समुदाय के लोग भी इस अवसर पर आते हैं और सुखी जीवन की कामना करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पूरे साल इस मेले की प्रतीक्षा करते हैं।

Simdega से कितना दुरी पर है Ramrekha dham

रामरेखा धाम simdega जिले मुख्यालय से 26  किलोमीटर साउथ डायरेक्शन में स्थित है जहाँ आप बस ,बाइक या व्यक्तिगत गाड़ी से आसानी से जा सकते हैं

 

 

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सिमडेगा के ramrekha dham के आस पास घुमने की जगह

झारखंड के पर्यटन स्थल में से एक और simdega के पवित्र स्थल श्री राम  स्थल ramrekha के आस पास कई ऐसे भी जगह हैं जिसे लोग visit करते है वैसे यदि आप भी रामरेखा धाम घुमने एवं मंदिर इ दर्शन करने के सोच रहे हैं तो इस जगह आप जरुर आइये साथ ही इसके आस पास के simdega ghumne ki jagah जगहों को भी जरुर घुमए आइये कुछ नाम बताते हैं जिन्हें आप जाकर घूम सकते हैं

  • simdega केला घाट डैम
  • कोम्बंग डैम

 

 

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