किस मशहूर शहर को लोग मायापुरी के नाम से जानते हैं? Mayapuri Mandir मायापुर कृष्णा मंदिर

भारतीय  मंदिरों की बात करें तो भारत में अनेकों प्रसिद्ध मंदिर है लेकिन पश्चिम बंगाल में एक प्रसिद्ध मंदिर Mayapur temple जो कि एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है जिसे

Temple of the Vedic Planetarium (TOVP) – ISKCON Mayapur Chandrodaya Mandir বৈদিক তারামণ্ডল মন্দির – ইসকন মায়াপুর চন্দ্রোদয় মন্দির मंदिर मायापुर के नाम से जानते हैं

आज इस मंदिर के बारे में आपको हम इस लेख के माध्यम से बताने वाले आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की नदिया जिले में स्थित मायापुर नगर की जो की मायापुरी  नवदीप के में स्थित है  लोगो का सवाल रहता है की मायापुरी क्यों प्रसिद्ध है बता दे की वैष्णो संप्रदाय की देहाती महत्वपूर्ण जगह माना जाता है कहा यह भी जाता है कि भगवान श्री महा चैतन्य प्रभु का जन्म किसी स्थान पर हुआ था और यहां पर राधे कृष्णा का भव्य मूर्ति का निर्माण किया गया है इस मंदिर पर श्रद्धालु देश-विदेश से दर्शन के लिए आते हैं

Mayapur temple

कोलकाता से लगभग 140 किलोमीटर उत्तर पश्चिम स्थित या विशालकाय मंदिर कृष्ण अनुराधा के लिए विख्यात है कृष्णा नगर में स्थित इस मंदिर को एशिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर भी कहा जाता है मायापुर नवदीप गंगा नदी के किनारे में स्थित है परंतु यह मुर्शिदाबाद से बहते हुए जलंगी नदी आती है जिसे जलंगी नदी कहते हैं इसलिए इस नदी को जलंगी नदी भी कहा जाता है मांयापुर कृष्ण मंदिर में जाने के लिए आपको जलंगी नदी पार करनी होती है या यदि आप सीधे मंदिर के पास जाना चाहते

तो आपको थोड़ा घूम के जाना पड़ेगा उसके लिए थोड़ी सी आपको डिस्टेंस ज्यादा पड़ेगी यदि आप जालंधर नदी को पार करके जाते हैं तो वहां से आपको नौका पार करनी पड़ेगी इसके लिए किराया आपको देनी होती है ₹10 टिकट के साथ आप जलंगी नदी पार कर मायापुर मंदिर दर्शन के लिए जा सकते हैं

मंदिर प्रांगण में घुसते ही आपको एक बहुत बड़ा सा गेट दिखाई देगा साथ ही नव निर्मित मायापुर श्री कृष्ण टेंपल आपको वहां पर दिखा देता है वैसे मायापुर श्री कृष्ण मंदिर जो है वह आपको जो नवनिर्मित मंदिर है उसके पीछे में मंदिर दिखाई देता है परंतु जो मंदिर बन रहा है वह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा

कृष्णानगर नवदीप मायापुरी  इस्कॉन mayapur iskon temple मंदिर क्यों प्रसिद्ध है पुरानी कथाओं का मानक भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म 1486 हुआ था इसी जगह हुवा था जिसे एक पावन स्थल माना जाता है , श्री कृष्णा और राधा का अवतार भी माना जाता है इसलिए इस जगह पर श्री कृष्णा राधे की भव्य प्रतिमा मनाया गया है ।

Iskon मंदिर में देखने लायक दर्शनीय

मायापुर श्री चैतन्य मठ श्री चैतन्य मठ के नाम से प्रसिद्ध चेतन देव की मौसी और चाची का घर देख सकते हैं 

श्रीवास आंगन मायापुरी

कहा जाता है कि श्री चैतन्य देव की एक वाद्य यंत्र को दो भाई जिनका नाम  जगाई और  मधाए ने तोड़ दिए थे उनका टूटा हुआ खोल का एक हिस्सा अभी भी इस जगह संरक्षित करके रखा गया है

मायापुर इस्कॉन चंद्रोदय मंदिर

भगवान श्री कृष्ण के जीवन की कहानी को दर्शाया गया जिसमें आपको कृष्ण राधा की मूर्ति स्थापित दिखाई देती है साथ ही इस जगह देश-विदेश से भक्तों का जमवाड़ा लगा रहता उसके साथ साथ इस जगह पर श्री भागवत गीता , लाइब्रेरी, तरह-तरह के धर्म से जुड़े  वैणव संप्रदाय संबंधित पहचान चिह्न आपको यहां पर खरीदने का मौका मिल सकता है

Iskon temple क्या है चलिए जानते हैं  इस्कॉन का अर्थ होता है इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शस्नेश यह एक संस्था के रूप में काम करती है जो की दुनिया भर में भगवान कृष्ण की उपासना और भागवत गीता के संदेश को दुनिया में पढ़ने के काम करती है भारत में लगभग 400 से अधिक इसके संस्थान केंद्र हैं

इस्कॉन संस्था के संस्थापक की बात करें तो प्रभुपाद जी महाराज जो आयुर्वेदिक दवाई बनाने का काम किया करते थे इन्हीं के सौजन्य के देखरेख में इस संस्था का निर्माण किया गया और आज देश-विदेश में श्री कृष्णा राधे भगवत गीता का प्रचार प्रसाद हो रहा है और अधिक जानकारी के लिए  https://hi.wikipedia.org/ की वेबसाइट पर जा सकते हैं

कैसे पहुंचे मायापुर मंदिर

जी हां श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म स्थल मंदिर में आने के लिए आपको ट्रेन बस और हवाई जहाज का मदद ले सकते हैं यदि आप वेस्ट बंगाल के बाहर से आ रहे हैं तो आपको ट्रेन से आने पर आपको हावड़ा उतरना होगा उसके बाद वहां से आपको सीधे लोकल ट्रेन पड़कर कृष्णा नगर पहुंचना होगा । अयोध्या बस से आते हैं तो बस से आप सीधे कृष्णा नगर आए और कृष्णा नगर से सीधे आप मायापुर मंदिर टेंपो रिक्शा या छोटी बस करके आ सकते हैं

यदि आप विदेश से आते हैं तो आपको इंटरनेशनल हवाई अड्डा नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डा कोलकाता में उतरना होगा वहां  से फिर टैक्सी या टूरिज्म बस के माध्यम से सीधे आप इस मंदिर तक आ सकते हैं

 

 

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