Top attraction place in Sonbhadra district | robertsganj tourist places

Top attraction place in Sonbhadra district
Top attraction place in Sonbhadra district | Best places to visit in up

Top attractions in Sonbhadra, RobertsGanj tourist places जी हाँ दोस्तों आपको ट्रेवलिंग पसंद  है और आप घूमने फिरने का शौकीन रखते हैं तो आप सोनभद्र ट्रिप प्लान   Sonbhadra trip plan कर सकते हैं उत्तर प्रदेश का यह सबसे बड़ा जिला है और इस जिले में प्राकृतिक ने खूबसूरती का चार चांद लगा रखी  है सोनभद्र जिले में कई  मशहूर किला जो कि अपने इतिहासिक धरोहर और सुंदरता के आकर्षण के लिए जाना जाता है

यहां घूमने की बेहतरीन जगह हैं जहां पर आपको अघोरी किला, विजयगढ़ किला जैसे किला आपको  देखने को मिलता है प्राचीन एवं बेहद दुर्लभ हो चुके ये किले  प्रसिद्ध है लोग हर वर्ष यहां पर हजारों हजार की संख्या में Places to visit in Sonbhadra को देखने  के लिए आते हैं साथ ही  कई ऐसे Tourist attractiveness  in Sonbhadra में मौजूद हैं जिनमें से मुक्खा फॉल और रिहंद बांध यहां का प्रमुख आकर्षण का केंद्र है

इस तरह पर्यटकों को यहां के किला और पांचवीं शताब्दी में बनाया गया यह अद्भुत किला  लोगों को अपनी और मोहित करता है प्रकृति के सुंदरता और यहां की  गौरवशाली इतिहास के बारे  लोगों को बताता है आज के इस लेख में आपको हम उत्तर प्रदेश में घूमने लायक बेहतरीन जगह  के बारे में बताने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें आपको उत्तर प्रदेश के बेस्ट टूरिस्ट प्लेस उत्तर प्रदेश में घूमने लायक जगह एवं उत्तर प्रदेश के मंदिर सोनभद्र किला जैसे प्रमुख आर्टिकल में मेंशन किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में घूमने की बेस्ट जगह robertsganj tourist places

वैसे तो उत्तर प्रदेश अपने विरासत्कालीन पूर्वजोंके राजा महाराजाओं  के काल में अद्भुत चित्रकारियों कलाओं के लिए जाना जाता है वैसे में हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की सोनभद्र जिले में घूमने की जगह के बारे में तो आपको बता दे की सोनभद्र एक ऐसा जगह है जहां पर पांचवीं शताब्दी में एक किला का निर्माण किया गया था जिसका नाम है विजयगढ़ किला यह कैमूर के पहाड़ियों पर बसा है और और इसके चारों ओर पहाड़ी और प्रकृति संदेश भरा पड़ा है कहते हैं कि इसमें चार तालाब है और इस तालाब में 12 महीने पानी भरा रहता है

सोनभद्र में घूमने लायक जगह  sonbhadra complete tour guide

रिहंद डैम

अघोरी फोर्ट सोनभद्र नाम से ही आपको पता चल रहा है कि यह सोन नदी के किनारे बसा एक ऐसा शहर है यहां पर आपको अघोरी फोर्ट देखने को मिलता है,जो लगभग 150 साल पुरानी है बता दे की वाराणसी से सीधे आप इस रास्ते के लिए जा सकते हैं जिसकी दूरी लगभग 35 किलोमीटर बताई जाती है इस किले से आप सोन नदी के बाटी धाराओं को साफ एवं स्पष्ट देख सकते हैं जो अद्भुत दिखाई पड़ता है इतिहासकारों का माने तो बालेंदू शाह ने इसका निर्माण करवाया था जो की खरवार वंश के शासक माने जाते हैं

What are some tourist spots in sonbhadra up

  1. शिवद्वार मंदिर -सोनभद्र जिले में स्थित यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या उमा के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या उमा महेश्वरी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या उमा महेश्वर मंदिर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या उमा महेश्वर मंदिर कहा के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे शिव मंदिर या उमा महेश्वर मंदिर कहा जाता है
  2. रिहंद बांध उत्तर प्रदेश में स्थित गोविंद बल्लभ पंत सागर जिसे की रेहान बांध के नाम से जाना जाता है और यह भारत का सबसे बड़ा बांध है जो कृत्रिम तरीके से सबसे बड़ा झील है और यह झील सोन नदी का सहायक बांध है
  3. अगोरी मंदिर अघोरी किला उत्तर प्रदेश के चोपन से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक अघोरी किला है जो सोनभद्र जिले में पड़ता है और यह सोन नदी के किनारे स्थित है यह प्राचीन किला है और और यहां पर कई मंदिर है जिस पर कई प्राचीन मूर्तियां भी देखने को मिलता है पुराने किले होने की वजह से आज इसके लिए का जर्जर वाली स्थिति हो गए हैं परंतु इतिहास को नजदीक से जानने के लिए आप इस जगह को जरुर विजिट कर सकते हैं यहां पर एक अघोरी मंदिर है और यह अगौरी बाबा का धार्मिक स्थल होता है उसके साथ-साथ यहां पर देवी काली का भी एक मंदिर है
  4. वीर लोरिक पत्थर यह एक लोक कथा है जिसमें अपने प्रेम की प्रमाणिकता देने के लिए एक झटके से तलवार से पत्थर को काट देता है एक प्रेमी का कहानी है

सोनभद्र में घूमने की बेस्ट समय

सोनभद्र  जिले में घूमने के लिए आपको किसी विशेष महीने की जरूरत नहीं पड़ती है परंतु यदि आप ठंढ के दिनों में यहां पर आते हैं तो आपके यहां के हरियाली किले का चमक धमक कुछ अलग ही दिखाई देता है जिसकी वजह से लोग यहां के हरियाली को पसंद करते हैं प्रकृति सुंदरी को पसंद करती है और यहां पर ठण्ड के  दिनों में आना पसंद करते हैं

सोनभद्र जिले के आसपास घूमने की जगह

चंद्रप्रभा वन्य जीव अभ्यारण्य चंदौली जिले में स्थित चंद्रप्रभा वन्य जीव अभ्यारण वाराणसी से निकट में स्थित है जो की चंदौली जिले में पड़ता है और यह एक खूबसूरत वन्य जीव अभ्यारण है जहां पर कोई जंगली जानवर मौजूद हैं प्राकृतिक झरने और प्राकृतिक सुंदर से भारी पूर्ण यह वन्य जीव अभ्यारण का दृश्य देखने लायक बनता है

बिजली संयंत्र का उत्पादन के प्रसिद्ध है

कैमूर पहाड़ियों के मध्य। सोनभद्र की कई बिजली संयंत्र स्थापित है जिससे भारत में कई शहरों में बिजली पहुंचाया जाता है। जिसकी वजह से सोनभद्र एक प्रसिद्ध स्थान लोग अकसर गूगल में सर्च करते हैं की सोनभद्र क्यों प्रसिद्ध है 

इस तरह यदि आप घुमने फिरने के शौकीन है और इतिहास को नजदीक से जानना चाहते हैं तो आप ऐसे कई ऐतेहासिक भारत की धरोहर मौजूद हैं जिन्हें आप visit कर सकते हैं साथ ही उत्तरप्रदेश की और भी पर्यटन जगह के बारे में जानने के लिए उत्तरप्रदेश पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट https://upstdc.co.in/website/default.aspx  को देख सकते हैं और जानकारी ले सकते हैं

सोनभद्र कैसे आ सकते हैं

सोनभद्र जिले में यदि आप घूमने का प्लान कर रहे हैं और आप उत्तर प्रदेश के बाहर से आ रहे हैं तो सबसे पहले आपको परिवहन के तीन साधन को चुनाव करना पड़ता है जिसमें से बस रेल पर हवाई जहाज मौजूद है

  • बस – बस के माध्यम से आप कई रास्ते हैं जिनसे आप सोनभद्र जिले पहुच सकते हैं
  • रेल  -भारतीय रेल के माध्यम से आप सोनभद्र की नजदीकी रेलवे स्टेसन वाराणसी आ सकते हैं |
  • हवाई जहाज -सोनभद्र आने के लिए सबसे पहले बनारस के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को उतरना होगा उसके बाद वहां से आप ऑटो रिक्शा या बस पकड़ कर सीधे सोनभद्र आ सकते हैं

अकबर ने क्यों नही कर पाया कब्ज़ा इस किले को Palamu kila, palamu fort in Latehar

palamu kila ka rahasya | palamu kila history in hindi

पलामू डाल्टनगंज शहर मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुराना किला एवं नया किला झारखंड के ऐतिहासिक किलो में से एक पलामू का 400 साल पुराना ऐतिहासिक धरोहर है कहा जाता है की इस किले को अकबर ने कब्ज़ा करने की कोशिश की थी पर वो नाकाम रहा  palamu four history

पलामू किला हिस्ट्री इन हिंदी  palamu kila history in hindi

दक्षिण पठार में स्थित palamu kila ka rahasya | palamu kila history in hindi  झारखंड राज्य अपने ऐतिहासिक स्थल एवं धरोहर के लिए जानी जाती झारखंड में कैसे पर्यटक स्थल है जहां पर लोग दूरदराज से इसके ऐतिहासिक हिस्ट्रिकल बातों को जानने के लिए आते हैं झारखंड के पलामू में स्थित लातेहार जिले में पलामू का किला के नाम से प्रसिद्ध किला लेकर ऐतिहासिक धरोहर है जिसे देखने के लिए लोग झारखंड के अन्य हिस्से एवं राज्य के बाहर से भी आते हैं एवं झारखंड अपने ऐतिहासिक गौरव के लिए जानी जाती है आज के इस लेख में आपको हम लातेहार जिला के पलामू का किला के बारे में बताएंगे

पलामू का किला का निर्माण किसने किया था Palamu kila daltongaj

लातेहार जिला मुख्यालय से सुंदर भारती क्षेत्र जंगलों के बीच में राजाओं के द्वारा निर्माण किया गया एक भव्य किला है था जो अब खंडहर के रूप में तब्दील हो गया है एक जो किला है वह मैदानी इलाका में है परंतु जो किला जंगल के बीचो-बीच है वह किला खंडहर में तब्दील हो चुका है कहा जाता है कि इस किला का निर्माण चेरो राजवंश के राजा गोपाल राय ने 1766 से 1770 के आसपास इसका निर्माण करवाया था

अपने प्राचीन गौरवशाली इतिहास के लिए भारत जानी जाती है ऐसे में भारत में कैसे ऐतिहासिक किले का निर्माण राजाओं के द्वारा किया गया था जिसके फल स्वरुप अनेक राज्यों में कैसे ऐतिहासिक किले हैं जो आज भी उनके ऐतिहासिक कहानी बयां करती हैं झारखंड राज्य में एक ऐसा किला है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे प्राचीन किलों में से एक है

और इसे पुराना किला भी कहा जाता है इसका निर्माण चेरो वंश के राजाओं ने किया था इस किले का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया है जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाया गया था जीरो वंश के राजाओं के द्वारा दो केले का निर्माण किया गया एक जो किला है वह मैदानी क्षेत्र में है और दूसरा किला पहाड़ी से सटे जंगल के बीच में किया गया है

इसे भी पढ़े -Navratangarh kila gumla | नवरतनगढ़ किला गुमला झारखंड

किले की भौगोलिक दृष्टिकोण

पलामू जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर का दूरी में स्थित दो खंडहर किले जिसको पुराना किला एवं नया किला के नाम से जानते हैं कहा जाता है कि पुराना किला जो चिरू राजवंश के निर्माण कल से पहले से यहां पर मौजूद था इसके लिए का निर्माण इस तरह किया गया था कि इसके तीन मुख्य द्वार थे एवं नए किले का निर्माण राजा मेदिनी राय के द्वारा किया गया था

पलामू किला का महत्व history of Palamu fort

लातेहार जिला में स्थित पलामू का किला झारखंड के ऐतिहासिक धरोहर में से एक है यदि आप इतिहास को पढ़ते हैं इतिहास को जानने की इच्छा रखते हैं तो आप ऐसे ऐतिहासिक चीजों से रूबरू हो सकते हैं जिसके लिए आप झारखंड के कई ऐसे किले हैं जहां आप जाकर विजिट कर सकते हैं और उसके ऐतिहासिक दृष्टिकोण को जान सकते हैं साथ ही

पलामू किला पहुंचने के रास्ते

पलामू की न पहुंचने के लिए आपको बस ट्रेन एवं हवाई जहाज व्यक्तिगत गाड़ी से आप इस जगह आ सकते हैं
रेलगाड़ी से कैसे आए _यदि आप रेलगाड़ी ट्रेन के माध्यम से इस जगह घूमने के लिए आ रहे हैं तो सबसे पहले आपको डालटनगंज रेलवे स्टेशन में उतरना होगा उसके बाद वहां से आप ऑटो बस टैक्सी कर सकते हैं
बस से कैसे आए यदि अब बस से आते हैं तो आपको राजधानी रांची के बस अड्डे पर उतरना होगा वहां से आपको कई सारे बसे मिल जाते हैं डायरेक्ट डाल्टनगंज के लिए डालटेनगंज आने के बाद आपको यहां से छोटी-छोटी गाड़ी मिल जाएगी
हवाई जहाज से कैसे आए

झारखंड में कई ऐसे रहस्य मई एतेहासिक धरोहर मोजूद हैं जिन्हें आप जान सकते है | पलामू किला की और अधिक जानकारी के लिए visit करे https://palamu.nic.in/

 

 

Ayodhya Ram Mandir | अयोध्या राम मंदिर के मुख्य पुजारी पिछले 32 सालों से रामलाल की पूजा अर्चना करते आ रहे

Ayodhya Ram Mandir | अयोध्या राम मंदिर

Ayodhya Ram Mandir | अयोध्या राम मंदिर

Ayodhya Ram Mandir | अयोध्या राम मंदिर  भगवान रामलाला की जन्मभूमि और हिंदुओं का सबसे पवित्र स्थल अयोध्या Ayodhya Ram Mandir जहां पर राम मंदिर का उद्घाटन समारोह 22 जनवरी 2024 को होना तय है इसके लेकर उद्घाटन की सभी तैयारी अभी से ही शुरू की जा रही है रामायण के अनुसार भगवान श्री राम की जन्म इसी जगह हुआ था इसलिए इसे श्री राम जन्मभूमि कहते हैं वर्ष 2024 में जनवरी 22 को रामलाला का जन्मदिन मनाया जाएगा

जी हां इसी जगह एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जो की 22 जनवरी को इसका शुभारंभ किया जाना है प्राचीनकाल का माने तो इसी जगह राम जी का मंदिर पहले हुआ करता था जिसे तोड़ बाबर के द्वारा तोड़ दिया गया था  और फिर काफी सालों के बाद यहां पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है

कहा यह भी जाता है कि भगवान श्री राम का जन्म काल 5115 ईसवी पूर्व हुआ था जो कि द्वापर कल युग में माना जाता है रामायण काल के अनुसार जो भी कहानी हम अपने पूर्वजों से सुनते हैं या टीवी सीरियल में देखते हैं इसी द्वापर युग की कहानी के रूप में हमें चलचित्र दिखाया जाता है आज के इस  लेख में हम बात करने वाले हैं अयोध्या नगरी के बारे में भगवान श्रीराम की जन्म भूमि और भव्य मंदिर बारे में

Ayodhya Nagar  | अयोध्या का इतिहास

अयोध्या का इतिहास रामायण में अयोध्या नगरी सरयू तटके किनारे बसे होने के साक्षात प्रमाण मिलते हैं अयोध्या Ayodhya को पहले उत्तरकोशिला नाम से जानते थे  इतिहासकारों का माने तो कई ऐसे प्रमाण मिले हैं जिसे जिससे अयोध्या  समय जो अयोध्या नगरी  समृद्ध होने के साथ-साथ विशाल थी बड़े-बड़े सड़क सड़क की बगीचे  महल आम के बगीचे और चौराहों का एक विशाल स्तंभ हुआ करता था हर व्यक्ति के घर संपन था रामराज्य हुआ करता था  यहां पर सुंदर नगरी और लंबी सड़के जैसे थी

राम मन्दिर का निर्माण विक्रमादित्य ने करवाया था

आज से एक सदी पूर्व अयोध्या के सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जैन की चक्रवर्ती ने इस मंदिर का निर्माण कराया था करने का साक्षात प्रमाण मिलते हैं, उनके अनुसार कुछ चमत्कार दिखाई देने पर वहां के संत योगी ने सम्राट से से बनवाने का आग्रह किया और फिर  बाद में  सम्राट ने यहां पर एक  मंदिर कराया एवं श्री राम जन्मभूमि में श्री राम जी का एक भव्य मंदिर के रूप में निर्माण करवाया

प्राचीन काल में अयोध्या Ayodhya को किस नाम से जानते थे इसका पुराना नाम क्या था

प्राचीन काल का माने तो अयोध्या का प्राचीन नाम उत्तरकोशिला था जिसकी राजधानी अयोध्या थी रामायण के माने तो अयोध्या Ayodhya का प्रथम राजा पवन सूर्य के पुत्र और भगवान ब्रह्मा के वंशज ने की थी और इसके प्रथम शासक जो थे इक्शाकु थे जो वैवस्वत मनु के पुत्र थे

राम मंदिर का भूमि का क्षेत्रफल कितना है

लगभग 156 एकड़ में फैला राम मंदिर जन्मभूमि की ऊंचाई 236 फीट लगभग बताईए जाती है जो मंदिर की ऑफिशल वेबसाइट से पता चलता है और अधिक जानकारी के लिए  मुख्य मंदिर – श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से कर सकते हैं |

22 जनवरी 2024 को होगा  मर्यादापुर्सोतम श्रीराम  जी मंदिर का उद्घाटन

अयोध्या राम मंदिर की लगभग सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी है और रामलाला की भव्य मंदिर के लिए लोगों की उत्साहित और अधिक लालसा बढ़ गई इसी बीच में श्री राम जन्मभूमि के मंदिर के लिए पुजारी का भी चर्चा हो रही है इसी बीच ABP न्यूज वेब के में लेख के अनुसार मंदिर में रामलाला  की पूजा अर्चना करने के लिए लगभग 3000 आवेदकों में से 50 चयन हुआ है लेकिन बरसों से पूजा पाठ करते आ रहे हैं मंदिर के पुराने पुजारी जिनका नाम पंडित सत्येंद्र दास जी है उनका क्या कहना है

मंदिर के प्रमुख पुजारी सत्येंद्र दास राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी है और पिछले 32 सालों से रामलाल की पूजा अर्चना करते आ रहे है सत्येंद्र दासजी का चयन 1932 ईस्वी में बाबरी विद्व्हन्स  9 माह पहले से हुआ था उसकी उम्र लगभग 80 वर्ष हो चुकी है परंतु आज भी वह रामलाला पूजा अर्चना करते आ रहे हैं सत्येंद्र दास जी ने बताया कि मेरी रामलाला  की सेवा के कार्यकाल लगभग 3 दशक पूर्ण हो चुकी है और मैं आगे भी करता रहूंगा

 

Bharat ki khoj kab or kisne ki thi भारत की खोज कब और क्या थी

Bharat ki khoj kab or kisne ki thi

भारत की खोज कब और किसने की थी

इतिहास के अनुसार पुर्तगाल का एक नाविक 1497 में व्यपार  के उद्देश्य से भारत  की खोज में निकलता है  जिसका नाम  “वास्कोडिगामा “था आज के इस लेख में  1498 में वास्कोडिगामा ने भारत को कैसे खोजा Bharat ki khoj kab or kisne ki thi और वह कौन सा व्यापारी था जिसने भारत खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इस विषय पर चर्चा होते रहती हैऔर सभी को जानने को उत्सुक  होती है हेल्लो दोस्तों आज के इस लेख में आपलोगों को  भारत की खोज कैसे हुई थी BHARAT KA KHOJ KISNE KI थी, के बारे में बताने जा रहे हैं भारत एक सोने की चिड़िया वाला  देश है जहां पर अनेक खनिज संपदा भरे पड़े हैं पश्चिमी देशों को यह मत थीBHARAT KA KHOJ KISNE KI || भारत की खोज कैसे हुई थी

भारत की खोज कब और किसने की थी  |Discovery of Bharat

कि भारत नामक देश  है जो सोने की चिड़िया और वहां अनेक सोना चांदी हैं तो वे बस कहानी में सुनने को मिलता है दरसल उन्होंने भारत के बारे में कुछ पता नहीं था पश्चिम दिशा में दो देश थे पुर्तगाल और स्पेन भौगोलिक खोजो के बारे में सबसे बड़ा रूचि  था क्योंकि पुर्तगाल और स्पेन व्यापार के मामले में सबसे आगे थे और यह व्यापार करने के लिए अलग-अलग देश में जाया करते थे कि भारत की बात होती थी

उस समय भारत आज वाला  भारत नहीं थी बल्कि भारत  जिसमें अफगानिस्तान पाकिस्तान जिसे अनेक देश  शामिल थे जब पुर्तगाली को यह बात पता चला कि भारत नामक देश सोने की चिड़िया है और  वहां  बहुत अधिक सोने चांदी और खनिज सम्पदा भरा पड़ा है तो उनके अन्दर भारत की  खोज का उत्सुकता बढ़ गयी और वहां के एक नाविक को खोजने के लिए वहां के राजा द्वारा भेजा गया तो दोस्तों आज कि इस  आर्टिकल में हम लोग जानेंगे कि BHARAT KA KHOJ KISNE KI थी और कब की थी वह कौन सा व्यापारी था जो समुद्र के रास्ते पर दक्षिणी छोर केरल कालीकट बंदरगह  में आया था

1498 ME BHARAT KA KHOJ KISNE KI और वास्कोडिगामा ने भारत को कैसे खोजा ||  और वह कोंन था

इतिहास का माने  तो भारत का खोज किसने की1498 ME BHARAT KA KHOJ KISNE KI भारत का खोजने का श्रेय पुर्तगाल की एक नाविक जिसका नाम वास्कोडिगामा था जिसने भारत को खोज किया  परंतु इससे पहले भी भारत की खोज के लिए  सन 1492 ईस्वी में स्पेन का एक निवासी जिसका नाम कोलंबस था वह भारत की खोज में निकलता है परंतु वह रास्ता भटक कर  वह अमेरिका को खोज कर लेता हैं  1498 BHARAT KA KHOJ KISNE KI

Image credit by : Nolegtak.com

ठीक उसके 6 साल बाद भारत की खोज में पुर्तगाल का एक नाविक वास्कोडिगामा  1498 ईस्वी  में अफ्रीका महादीप के तटीय इलाके से होते हवे उत्मासा अंतदीप (Cape of Good Hope) से होते हवे  भारत के केरल  राज्य कालीकट बंदरगाह  में पहुंचकर भारत को खोज लेता है  वास्कोडिगामा एक व्यपारी था जो  समुद्र के रास्ते आने वाले पहले  पुर्तगाली व्यपारी बन जाता है जो एक व्यापार की उद्देश्य से भारत आया था जो मसाले के व्यपार करने  आया था लेकिन वास्कोडिगामा भारत को खोजने वाला पहला व्यक्ति नही था

जिसने भारत को खोज की बल्इकि इससे पहले अरब के आक्रमण कारी  भारत पर पहले से ही प्रवेश कर चुके थे  और अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते थे पश्चिम के देशो को यह पता था की भारत नाम का कोई देश है , लेकिन सवाल फिर ये आता है की जब पता था की भारत नाम का कोई देश है तो पहले इसे क्यों  नही खोजा गया तो आपको बता दे की  स्थल मार्ग के माध्यम से भारत तक आना इतना आसान नही था क्योकि स्थल मार्ग में अरब के देश बीच में आ रहे थे

जिससे आना नामुमकिन था इस वजह से वे देर से भारत की खोज में आये अब बात आती है की फिर इसे कैसे खोजने की  दिलचस्प बढ़ी  पुर्तगाली स्पेन दोनों ने खोजने के लिए अपना आदमी भेजा जिसमे पुर्तगाली नाविक जिसका नाम वास्कोडिगामा था उसने भारत का खोज किया जिसे Discovery of India भी कहा जाता है

BHARAT KI KHOJ KAB OR KYA THI:- वास्कोडिगामा भारत कब आया था

इतिहास का माने तो लोग गूगल में टाइप करते हैं 1498 ME BHARAT KA KHOJ KISNE KI इस संदर्भ में  जब वास्कोडिगामासमुद्र के रास्ते 8 जुलाई 1997 को पुर्तगाल से एक नाविक जिसका नाम वास्कोडिगामा जो भारत की खोज  में निकलता है वह अपने 160 -170 नवीकृत दल के साथ एक जहाज से वह भारत की खोज की तरफ बढ़ता है वह उसी रास्ते का इस्तेमाल करते आगे बढ़ता है जिस रास्ते से बर्थोलोमयीडियाज  अफ्रीका के तटीय इलाकों से होते हुए उतमासा अंतदीप तक आया था वास्कोडिगामा  भी उसी रास्ते से  होकर  अफ्भारीका महादीप के तटीय इलाके से होते हवे भारत  के दक्षिणी क्षेत्र केरल के कालीकट बंदरगाह पर पहुंचता है

भारत की खोज कब और क्या थी| bharat ka khoj kisne ki thi और वास्कोडिगामा भारत क्यों आया था

मुझे पता होना चाहिए कि पश्चिम विश्व से व्यापारी रहे और व्यापार के मामले में सबसे आगे रहे हैं जब पुर्तगाल लिस्ट में मासी को पता चला कि भारत नामक विदेश है जो सोने का चिड़िया है और बहुत ही खनिक संपदा से भारी कौन है बहुत सोने चांदी चौराहा था तो उन देशों को दिलचस्पी इस देश पर पड़े और देश के राजाओं ने यह निश्चय किया कि हर हालत में भारत की खोज करना जरूरी है तब पुर्तगाल के राजा ने एक नाविक जिसको वास्कोडिगामा कहते हैं

एक दल के साथ तैयार किया हो भारत की खोज में भेज दिया वास्कोडिगामा मसाला का व्यापार करने के लिए भारत आया था और यहां से जब जाने लगा तो अपने साथ काली मिर्च लेकर अपने जहाज से ले गया और उसे 60 गुना अधिक लाभ पर बेचा आप पुर्तगालियों का लालच और अधिक पड़ गया और भारत में आने का निश्चय किया और यहां पर आने के उपरांत उन्होंने फैक्ट्री लगाना शुरू किया और उन्होंने ने भारत में व्यपार करना सुरु किया जब बात आती है की सन 1498 BHARAT KA KHOJ KISNE KI

 

इसे भी पढ़े (नवरतनगढ़ किला गुमला झारखंड एक एतिहासिक धरोहर) जो की Jharkahnd  के गुमला जिले में मौजूद है |

FQA

1498 BHARAT KA KHOJ KISNE KI? वास्कोडिगामा ने भारत को खोजा

भारत की खोज की ईस्वी में हेई ?

भारत की खोज 1498 BHARAT KA KHOJ KISNE KI गयी |

वास्कोडिगामा कोन था और भारत कैसे आया था ? वास्कोडिगामा एक पुर्तगाली नाविक था जो अफ्रीका महादीप के रास्ते से भारत तक आया था

navratangarh kila gumla | नवरतनगढ़ किला गुमला झारखंड

navratangarh kila gumla | नवरतनगढ़ किला गुमला झारखंड

 Navratangarh Jharkhand : गुमला जिले के सिसई  प्रखंड में स्थित navratangarh kila gumla | नवरतनगढ़ किला गुमला झारखंड के  बारे में बात करेंगे पुरातात्विक एवं इतिहासकारों का माने तो यह नागवंशी राजा दुर्जन साल के कार्यकाल सन  1636 से 1640 के बीच में निर्माण किया गया था |  नौ मंजिला महल का निर्माण कराया था | इतिहासकार का माने तो नागवंशी शासक बैरी साल ने अपनी राजधानी खुखरा गढ़ से स्थानांतरित कर नवरतन  को नया राजधानी बनाया था नवरत्न गढ़ जो है पहले चारों और पहाड़ और पेड़ पौधे सेबड़े बड़े पत्थर से घिरा  भव्य किला का  निर्माण राजा दुर्जन शाल  ने करवाया था |

राजा दुर्जन साल में लगभग लंबे समय तक navratangarh  पर शासन  किया लंबे समय तक राज्य का राजा होने के उपरांत उन्होंने नवरत्न गढ़ में 9 मंजिला इमारत का निर्माण कराया और इस किले का नाम नवरत्न गढ़ रखा गया वर्तमान में 9 रतनगढ़ में जब आप  विजिट करने जाते हैं तो आपको आज भी नौरतनगढ़ किला navratangarh kila का खंडहर देखने को मिलता है वर्तमान में यह किला सरकार के हस्तक्षेप में हैं और सरकार के संरक्षण में है देखरेख किया जा रहा है आए दिन पर्यटकों का भीड़  लगा रहता है और लोग दूर-दूर से पुरातात्विक और इतिहास को देखने के लिए आते हैं

नवरतनगढ़ किले का इतिहास हिंदी में Navratangarh kile ka history in hindi

झारखंड के गुमला जिला में स्थित 45वें नागवंशी राजा दुर्जन शाल का कार्यकाल काफी लम्बे समय तक रहा था इतिहासकार के माने तो डोईसागढ़ नगर में सन 1571 में इस किले का निर्माण करवाया था जब आपने रतनगढ़ किला को देखने के लिए यहां आते हैं तो आपको चारों और पत्थरों से घिरा  बीच में  09 मंजिला  दिखाई देगा क्योंकि उस समय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस किला का निर्माण कराया गया था 

नवरतन गढ़

कैसे आ सकते हैं नवरत्न गढ़ किला को देखने के लिए

गुमला रांची मार्ग पर शीशे प्रखंड से 5 किलोमीटर की दूरी पर navratangarh kila gumla स्थित है यह गुमला से 35 किलोमीटर एवं शीशे बसिया रोड पर स्थित है चार और पहाड़ों के बीचो बीच इनमें जिला किले का निर्माण राजा दुर्जन साल ने करवाया था यह एक ऐतिहासिक धरोहर है जो धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर है परंतु सरकार की पहल से अब सरकार संरक्षण में है और इसे मरम्मत का कार्य किया जा रहा है

navratangarh fort history in hindi के बारे में क्या जानते हैं navratangarh gumla

झारखंड में वैसे तो राजा महाराजावों का किला कम देखने को मिलता है परन्तु जो भी किला झारखंड प्रदेश में है जैसे पलामू का किला ,रातूमहराज का किला ,रामगढ का किला,पद्मा का किला,नरायनपुर नवागढ़ का किला ,विश्रामपुर का किला,जैसे किलावों का नाम सबसे पहले आता है इसमें यदि बात करें पलामू का किला का तो इसका निर्माण काल 1766-1770 के लगभग चेरोवंशीय राजा गोपाल राय ने करवया था |

समय ब्यतीत होने के उपरांत इस किला का भी अस्तित्व जर्जर हो चूका है आज वर्तमान में खंडहर ही देखने को मिलेगा फिर भी पुरातात्विक एवं एतिहासिक होने की वजह से लोग इसे देखने आया करते हैं और यह पर्यटकों का मुख्य आकर्षण का केंद्र भी है इस किला को “पुराना और नया किला भी कहते हैं | साथ ही बेतला राष्ट्रीय उद्यान  भी बगल में ही है जो भारत की टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है |

रातू महाराज का किला राजधानी रांची में रातू महाराज का महल रातू किला है । इसे लोग रातूगढ़ भी कहते हैं। इस देश के छोटे नागपुर पर शासन करने वाले नागवंशीय शासन के 61 वें महाराज प्रताप उदयनाथ शाहदेव ने कहा था। महाराजा फणिमुकुट राय नागवंश के पहले महाराजा थे।

छोटानागपुर के नागवंशीय शासक  महाराज प्रताप उदयनाथ शाहदेव जिसने इस किले का निर्माण करवाया था  वे 61 वे नागवंशी राजा थे रातू का किला को रातू गढ़ का किला भी कहते हैं और ये झारखंड की राजधानी रांची में ही है | और इसे लोग रातू महाराज का किला के नाम से जानते हैं |

नवरतनगढ़ किला झारखंड Navratangarh Gumla Jharkhand 

 

FQA-

1.रांची से नवरतनगढ़ किला  की दुरी कितना है ?  (navratangarh fort distance from ranchi  )

उतर  रांची से नवरतनगढ़ किला  की दुरी 71 किलोमीटर है |

2. झारखंड के नवरतनगढ़ के किला का क्या इतिहास है ?

उतर  डोईसागढ़ नगर में सन 1571 में इस किले का निर्माण करवाया था नागवंशी शासक बैरी साल ने अपनी राजधानी खुखरा गढ़ से स्थानांतरित कर नवरतन  को नया राजधानी बनाया था नवरत्न गढ़ जो है पहले चारों और पहाड़ और पेड़ पौधे सेबड़े बड़े पत्थर से घिरा  भव्य किला का  निर्माण राजा दुर्जन शाल